Tuesday, July 6, 2021

बुद्धि परीक्षणों के प्रकार (Types of Intelligence Tests)

 बुद्धि परीक्षणों के प्रकार (Types of Intelligence Tests)

बुद्धि परीक्षणों को दो आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है-

1. प्रयोज्यों  या परीक्षार्थियों की संख्या (Number of Subjects or Examinees) के आधार पर। 

2. परीक्षणों के प्रस्तुतीकरण के स्वरूप (Forms of Presentation) के आधार पर। 

1. परीक्षार्थियों की संख्या के आधार पर बुद्धि परीक्षणों को दो वर्गों में विभाजित किया जाता है - 

(i) व्यक्तिगत बुद्धि परीक्षण (Individual Intelligence Test)।

(ii) सामूहिक बुद्धि परीक्षण (Group Intelligence Tests) ।

2. परीक्षणों के प्रस्तुतीकरण के स्वरूप के आधार पर भी उन्हें दो वर्गों में विभाजित किया जाता है - 

(i) शाब्दिक बुद्धि परीक्षण (Verbal Intelligence Tests) ।

(ii) अशाब्दिक बुद्धि परीक्षण (Non-Verbal Intelligence Tests)। 













व्यक्तिगत बुद्धि परीक्षण (Individual Intelligence Test)-

ये वे  बुद्धि परीक्षण हैं जो एक समय मे केवल एक ही  प्रयोज्य या परीक्षार्थी पर प्रशासित किये जाते हैं। इन परीक्षणों के प्रशासन में सर्वप्रथम परीक्षणकर्ता परीक्षार्थी के साथ संबंध स्थापित करता है और इस संबंधित व्यवहार से उसे सामान्य मानसिक स्थिति में लाता है , उसे किसी भी प्रकार के भय व चिंता से मुक्त करता है। इसके बाद उसे परीक्षण संबंधित निर्देश देता है  और अंत मे उसे परीक्षण में निहित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए कहता है।

मुख्य परीक्षण-  स्टेनफोर्ड बिने बुद्धि परीक्षण (Stanford Binet Test of Intelligence), वैशलर बुद्धि परीक्षण (Wechsler Intelligence Scale), मैरिल एवं पामर बुद्धि परीक्षण (Merril and Palmer Intelligence Scale), पिन्टर-पैटरसन परफोरमेन्स स्केल (Pinter- Paterson Performance Scale), मैरिल-पामर ब्लाक बिल्डिंग परीक्षण (Merril Palmer Block Building Test) और पोर्टियस भूल भुलैया परीक्षण (Porteus Maze Test) ।


सामूहिक बुद्धि परीक्षण (Group Intelligence Tests)—

ये वे बुद्धि परीक्षण हैं जो एक समय में अनेक (सैंकड़ों-हजारों) प्रयोज्यों (व्यक्तियों) पर एक साथ प्रशासित किए जा सकते हैं। इन परीक्षणों के प्रशासन में परीक्षणकर्ता को प्रयोज्य से किसी प्रकार के सम्बन्ध स्थापित करने की आवश्यकता नहीं होती। वह स्वयं या अन्य साथियों के माध्यम से बुद्धि परीक्षण को वितरित करा देता है। परीक्षण सम्बनधी निर्देश परीक्षण पर ही मुद्रित होते हैं या उन्हें अलग से मुद्रित कराकर परीक्षण के साथ वितरित करा दिया जाता है ।  

मुख्य परीक्षण - आर्मी एल्फा परीक्षण (Army Alpha Test), बर्ट सामूहिक बुद्धि परीक्षण (Burt's Group Intelligence Test), जलोटा बुद्धि परीक्षण (Jalota's Intelligence Test), रेविन्स प्रोग्रेसिव मैट्रिक्स (Raven's Progressive Matrix), कैटिल कल्चर फ्री परीक्षण (Cattell's Culture Free Test) और आर्मी बीटा परीक्षण (Army Beta Test)।

शाब्दिक बुद्धि परीक्षण (Verbal Intelligence Tests)-

  •  ये वे बुद्धि परीक्षण होते हैं जिनमें प्रश्नों एवं समस्याओं को शब्दों अर्थात् भाषा  के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है ।
  •  प्रयोज्यों (व्यक्तियों) को इनका उत्तर भाषा के माध्यम से ही देना होता है। 
  • इनका निर्माण एवं मानकीकरण करना सरल होता है ।

  • इनके निर्माण में खर्च कम  होता है ।
  • ये छोटे बच्चों की बुद्धि का मापन करने के लिए उपयुक्त नहीं होते। 

    • इनकी वैधता एवं विश्वसनीयता अधिक होती है। 
    • इसके  द्वारा मन्द बुद्धि बच्चों की बुद्धि का मापन सही ढंग से नही किया जा सकता।

    •  इन्हें व्यक्तिगत एवं सामूहिक दोनों रूपों में प्रयोग किया जा सकता है। 
    •  इनका प्रशासन सरलता से किया जा सकता है। 

    •  इनका अंकन वस्तुनिष्ठ होता है।

    • केवल शिक्षित व्यक्तियों पर ही प्रशासित किए जा सकते हैं। 


    अशाब्दिक बुद्धि परीक्षण (Non-Verbal Intelligence Tests)-  

    • ये वे बुद्धि परीक्षण हैं जिनमें प्रश्नों एवं समस्याओं को भाषा में प्रस्तुत न करके बड़े आकार  की वस्तुओं और चित्रों आदि के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है 
    • प्रयोज्यों (व्यक्तियों) को इनका उत्तर यथा क्रियाओं द्वारा देना होता है। ये परीक्षण केवल पेपर-पेन्सिल परीक्षण (Paper - Pencil Tests) के रूप में भी हो सकते हैं, केवल निष्पादन परीक्षण (Performance Tests) के रूप में भी हो सकते हैं और इन दोनों के संयुक्त रूप में भी हो सकते हैं। 
    • कागज-पेन्सिल परीक्षणों में वस्तुगत या चित्रात्मक समस्याएँ मुद्रित रूप में प्रस्तुत की जाती हैं और प्रयोज्य उनका हल पेन्सिल द्वारा करते हैं और निष्पादन परीक्षणों में विभिन्न प्रकार की वस्तुओं को प्रस्तुत कर उन्हें व्यवस्थित कराया जाता है और प्रयोज्य उन्हें यथा क्रम अथवा स्वरूप में व्यवस्थित करते हैं।

    • इनका निर्माण एवं मानकीकरण करना कठिन  होता है ।
    • इनका प्रयोग किसी पर भी किया जा सकता है ।

    • ये छोटे बच्चों एवं  मन्द बुद्धि बच्चों की बुद्धि के  मापन में विशेष उपयोगी होते हैं  ।
    • ये  अधिक वैध एवं विश्वसनीय होते  हैं । 

    • इनका प्रशासन  शिक्षित  एवं अशिक्षित व्यक्तियों  दोनों पर किया जाता है ।
    • इन्हें व्यक्तिगत एवं सामूहिक दोनों रूपों में प्रयोग किया जा सकता है। 

    Monday, July 5, 2021

    विचलन बुद्धि-लब्धि (Deviation Intelligence Quotient)

     विचलन बुद्धि-लब्धि (Deviation Intelligence Quotient)

    बुद्धि - लब्धि बच्चों की बुद्धि को अभिव्यक्त करने का एक बहुत महत्वपूर्ण माध्यम है। मानसिक आयु 16 - 17 वर्ष की अवस्था में पूर्ण  हो जाती है क्योंकि मनोवैज्ञानिकों का मत है कि 16 - 17 की उम्र में व्यक्ति की बुद्धि का विकास पूर्ण हो जाता है लेकिन शरीरिक आयु लगातार बढ़ती रहती है। अतः बुद्धि-लब्धि के सूत्र से 16 - 17 वर्ष की आयु के बाद बुद्धि- लब्धि निरंतर घटती जाती है जो वास्तिवकता से परे है।

    उदा०- यदि किसी व्यक्ति की वास्तविक आयु 34 वर्ष तथा मानसिक आयु 17 वर्ष है तो उसकी  बुद्धि लब्धि होगी-

    I.Q.   =   (MA/CA) ×100 = (17/34)× 100 =  50

    अतः वयस्क  व्यक्ति की I.Q. इस सूत्र की गणना करने से परिणाम में त्रुटि आती है। 

    • सर्वप्रथम वैशलर (Weschler) ने प्रौढ़ व्यक्तियों की I.Q.  मापने की समस्या के निवारण करने के लिए विचलन I.Q.  का प्रत्यय प्रस्तुत किया।
    • किसी व्यक्ति की बुद्धि लब्धि परीक्षण पर निष्पादन (Performance) की उसकी समान उम्र के अन्य व्यक्तियों की उसी परीक्षण पर औसत निष्पादन से तुलना करके विचलन I.Q.  की गणना की जाती है।
    • विचलन IQ (DIQ) द्वारा किसी व्यक्ति के प्राप्तांकों की व्याख्या उसके समान उम्र के लोगों पर तैयार किये गये मानकों के आधार पर की जाती है।
    DI.Q. =  x̄ ± σ

    x̄ = Mean or Average

    σ = Standard Deviation

    किसी  व्यक्ति की DIQ यह दर्शाती है कि 100 की औसत IQ से उसके विचलन का माप क्या है। (Deviation IQ is a measure of how far some one deviate from the average 1.Q. of hundred) विचलन बुद्धि-लब्धि एक मानक प्राप्तांक है । अतः विचलन बुद्धि-लब्धि ज्ञात करने के लिए पहले मानक प्राप्तांक ज्ञात करते हैं फिर उसे एक मापनी जिसका मध्यमान 100 तथा मानक विचलन 15 होता है में बदला (convert) जाता है और उसके अनुरूप उसकी व्याख्या की जाती है। 

     किसी छात्र ने एक बुद्धि परीक्षण पर 45 अंक प्राप्त किये तथा उसी परीक्षण पर उसकी आयु के 100 छात्रों के प्राप्तांकों का मध्यमान (Mean) 30 तथा मानक विचलन ( Standard Deviation) 10 है तो उस छात्र का

     मानक प्राप्तांक (Standard Score)=  (X-M)/S.D. = (45-30)/10 = 1.5 

    इस छात्र का विचलन बुद्धि की मापनी (Scale) जिसका मध्यमान 100 है तथा मानक विचलन 10 है, पर प्राप्तांक 100 से  σ =  1.5×10 =15 ऊपर अर्थात् DI.Q. =100+15 = 115 होगा।

    निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है। प्रौढ़ व्यक्तियों की बुद्धि-लब्धि के मापन में होने वाले दोषों को विचलन बुद्धि-लब्धि के द्वारा दूर किया जा सकता है।























    Sunday, July 4, 2021

    बुद्धि-लब्धि (Intelligence Quotient)

     बुद्धि-लब्धि (Intelligence Quotient) 


    बुद्धि- लब्धि से तात्पर्य बालक अथवा व्यक्ति की मानसिक आयु एवं वास्तविक आयु के अनुपात से होता है । इस अनुपात में से दशमलव बिंदु हटाने के लिए इस अनुपात को 100 से गुणा कर दिया जाता है।


     बुद्धि -लब्धि = (मानसिक आयु / वास्तविक आयु) × 100


    I.Q. =  (MA/CA) × 100

    Ex.- किसी बालक की मानसिक आयु 15 वर्ष है और उसकी वास्तविक आयु 12 वर्ष है तो उसकी बुद्धि- लब्धि  होगी-

    बुद्धि -लब्धि = ( 15 / 12) × 100  = 125

    वास्तविक आयु (Chronological Age)-

    बुद्धि परीक्षण के सन्दर्भ में किसी बालक अथवा व्यक्ति की वास्तविक आयु से तात्पर्य उस आयु से होता है जो उसकी बुद्धि परीक्षण देते समय होती है और चूँकि किसी व्यक्ति की बुद्धि का विकास सामान्यतः 16 वर्ष की आयु तक पूर्ण हो चुका होता है। इसलिए बुद्धि परीक्षण के सन्दर्भ में 16 वर्ष से अधिक आयु वाले व्यक्तियों की भी वास्तविक आयु 16 वर्ष मानी जाती है ।

    मानसिक आयु (Mental Age)-

    बुद्धि परीक्षण के सन्दर्भ में किसी बालक अथवा व्यक्ति की मानसिक आयु से तात्पर्य उनके बौद्धिक विकास (Intellectual Development) की सीमा (limit) से होता है। 

    बेसल वर्ष- जिस अधिकतम आयु स्तर के प्रश्नों को हल कर लेता है, वह उसका बेसल वर्ष माना जायेगा।

    टर्मिनल वर्ष - जिस आयु स्तर के प्रश्नों को हल नहीं कर पाता है, वह उसका टर्मिनल वर्ष होगा।

    • सर्वप्रथम ने I.Q. शब्द का प्रयोग किया -  विलियम स्टर्न (1912)
    • मानसिक परीक्षण शब्द का प्रयोग करने वाला पहला व्यक्ति-   कैटेल (1890)
    • बुद्धि मापन या परीक्षण का जन्मदाता - अल्फ्रेड बिने (1905)
    • मानसिक आयु (Mental Age) का विचार - अल्फ्रेड बिने, 1908
    • बुद्धि लब्धि के प्रथम प्रतिपादक -.  विलियम स्टर्न (1912)
    • बुद्धि- लब्धि  का सूत्र दिया गया -  लेविस एम० टरमन (1916)












    Monday, June 21, 2021

    बुद्धि के सिद्धान्त (Theories of Intelligence)

     बुद्धि के सिद्धान्त (Theories of Intelligence)

    1. एक कारक या एक सत्तात्मक सिद्धान्त (Unitary or Monarchic Theory)

    2. द्विकारक सिद्धान्त (Two factor or Bi-factor Theory)

    3. त्रिकारक सिद्धान्त (Three Factor Theory)

    4. बहुकारक सिद्धान्त (Multi-factor Theory)

    5. समुह कारक सिद्धान्त (Group factor Theory)

    6. त्रि-आयाम सिद्धान्त या बुद्धि  सरंचना प्रतिमान (Three Dimensional Theory or S.I. Model)

    7. बहु बुद्धि सिद्धान्त (Multiple Intelligence Theory)

    8. प्रतिदर्श सिद्धान्त (Sampling or Oligarchic Theory)


    एक कारक या एक सत्तात्मक सिद्धान्त (Unitary or Monarchic Theory)

    बुद्धि एक इकाई कारक (Unit Factor), शक्ति या ऊर्जा (Energy) है, जो सम्पूर्ण मानसिक कार्यों (Mental Works) को प्रभावित करती है। ऐसे विचार फ्रान्स के निवासी अल्फ्रेड बिने ने सर्वप्रथम 1905 में दिए । बिने के इन विचारों का अमेरिका निवासी टरमैन (Terman), स्टर्न (Stern) तथा जर्मन के एबिंघास (Ebbinghaus) ने समर्थन किया। इन विद्वानों के अनुसार बुद्धि एक ऐसी शक्ति (Power) है, जो सभी मानसिक कार्यों को संचालित, संगठित तथा प्रभावित (Managed, Organized and Influenced) करती है। इस सिद्धान्त के अनुसार यदि किसी व्यक्ति में उच्च स्तरीय बौद्धिक योग्यताएँ (higher Intellectual Abilities) होती हैं तो वह सभी क्षेत्रों में कुशलता (Efficiency) तथा निपुणता (Proficiency) प्राप्त कर सकता है। बुद्धि रूपी इस सर्वशक्तिशाली मानसिक प्रक्रिया (Mental Process)  को इन विद्वानों ने अलग-अलग नामों से पुकारा है। बिने ने बुद्धि के लिए ‘निर्णय लेने  की योग्यता (Decision making ability)', स्टर्न ने 'नवीन स्थितियों के साथ समायोजन स्थापित करने की योग्यता’ (Ability to make adjustments to new situations) तथा टरमैन ने 'विचारने की योग्यता (Ability to think)' शब्दों का प्रयोग किया है।


    द्विकारक सिद्धान्त( Two Factor or Bi-Factor Theory)

    ब्रिटिश मनोवैज्ञानिक स्पीयरमैन (Spearman) ने 1904 में  अपने प्रयोगों से यह निष्कर्ष निकाला कि बुद्धि दो कारकों (शक्तियों अथवा योग्यताओं) का से मिलकर हुई है। प्रथम कारक को उन्होंने सामान्य मानसिक योग्यता (General Mental Ability, G) तथा दूसरे कारक को विशिष्ट मानसिक योग्यता (Specific Mental Ability, S) कहा। 

    स्पीयरमैन के अनुसार- बुद्धि एक सर्वशक्तिमान सामान्य मानसिक शक्ति है, जो समस्या-समाधान में हमारी सहायता करती है एवं परिस्थितियों से समायोजन करने में सहायक होती है। (Intelligence is an all-powerful general mental power that helps us solve problems and adapt to situations.)

       स्पीयरमैन  ने स्पष्ट किया कि सामान्य योग्यता (G) व्यक्ति को सभी प्रकार के कार्यों में सहायता करती है और विशिष्ट योग्यता (S) उसे उसी कार्य में सहायता करती है जिसके लिए वह होती है। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि सामान्य योग्यता (G) एक ही होती है परन्तु विशिष्ट योग्यता (S) अनेक होती हैं। उन्होंने इन्हें क्रमशः सामान्य बुद्धि (General Intelligence) और विशिष्ट बुद्धि (Specific Intelligence) की संज्ञा दी और विभिन्न प्रकार की विशिष्ट योग्यताओं को S1, S2, S3, S4 आदि से व्यक्त किया है। 


    'G' कारक की विशेषताएँ (Characteristics of ‘G’ Factor)

    1. यह एक सामान्य मानसिक योग्यता (General Mental Ability) है जो सभी प्रकार के कार्यों के सम्पादन में सहायक होती है। 
    2. सामान्य बुद्धि सभी व्यक्तियों में कम और अधिक मात्रा में पाई जाती है। अतः यह एक सर्वव्यापी योग्यता (Universal ability) है। 
    3. 'G' कारक (Factor) पर प्रशिक्षण (Training) अथवा अनुभव (Experience) का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है अतः यह अपरिवर्तनीय (Irreversible) है तथा जन्मजात (In born) है। 
    4. ‘G’ कारक मनुष्य की सफलताओं को निर्धारित करता है अर्थात् जिसमें 'G' की मात्रा जितनी अधिक होगी, वह जीवन में उतना ही अधिक सफल रहेगा।
    5. 'G' को व्यक्ति की सामान्य मानसिक ऊर्जा (General Mental Energy) के रूप में माना जा सकता है।
    'S' कारक की विशेषताएँ (Characteristics of Specific Factor)

    1.  'S' कारक अर्थात् विशिष्ट योग्यता (Specific Ability) अनेक होती हैं।
    2. एक व्यक्ति में कई विशिष्ट योग्यताएँ  (Specific Abilities) हो सकती हैं।
    3. अलग-अलग व्यक्तियों में अलग-अलग प्रकार की विशिष्ट मानसिक योग्यताएँ  (Specific Mental Abilities) पाई जाती हैं। 
    4. अलग-अलग तरह की विशिष्ट मानसिक क्रियाओं (Specific Mental Activities) के सम्पादन  में अलग-अलग तरह की विशिष्ट बुद्धि की आवश्यकता होती है।
    5.  यह बुद्धि न स्थिर (Stable) होती है और न ही जन्मजात (In born) होती है।
    6.  'S' कारक पर प्रशिक्षण (Training) तथा अनुभव (Experience) का किसी विशेष सीमा तक प्रभाव पड़ता है अर्थात् यह परिवर्तनीय (Convertible) है। 
    7. किसी क्षेत्र विशेष के लिए व्यक्ति में उससे सम्बन्धित जितनी अधिक विशिष्ट बुद्धि (S) होगी वह उस क्षेत्र में उतना हीअधिक सफल होगा।
    स्पीयरमैन  के अनुसार 'G' कारक या सामान्य योग्यता में दो बातें हैं - 
    (i) सम्बन्ध शिक्षण (Education of Relation)
    (ii) सहसम्बन्ध शिक्षण (Education of Correlates)

    सम्बन्ध शिक्षण (Education of Relation) का अर्थ है - दो वस्तुओं (Objects) या वस्तु के भागों में सम्बन्ध का बोध (Sense) । (Understanding the relationship between two objects or parts of an object.)

    सहसम्बन्ध शिक्षण (Education of Correlates) का अर्थ है - एक व्यक्ति के मन (Mind) में एक वस्तु (Object) होने पर उस वस्तु (Object) का दूसरी वस्तु से सम्बन्ध (Relation) ज्ञात होने पर दूसरी सम्बंधित वस्तु के बारे में सोचना ।

    विद्वानों ने स्पीयरमैन की यह बात तो स्वीकार की कि मनुष्य के कार्यों में उसकी सामान्य बुद्धि (G) और विशिष्ट बुद्धि (S) कार्य करती हैं परन्तु इस सिद्धान्त से यह स्पष्ट नहीं होता कि किसी कार्य के सम्पादन में उसकी किस बुद्धि अथवा कारक का कितना योगदान होता है? इसलिए उन्होंने इस सिद्धान्त को भी स्वीकार नहीं किया।

    Tuesday, June 15, 2021

    बुद्धि की विशेषतायें एवं प्रकार (Characteristics and types of Intelligence)

     बुद्धि की प्रकृति एवं विशेषतायें (Nature and Characteristics of Intelligence)

    1. बुद्धि जन्मजात शक्ति है। (Intelligence is an innate power.)
    2. बुद्धि के उचित विकास के लिए पर्यावरण का महत्व है। (Environment is important for the proper development of intelligence.)
    3. योग की क्रियाओं द्वारा जन्मजात बुद्धि में वृद्धि सम्भव है। (Innate intelligence can be enhanced through yoga practices.)
    4. बुद्धि सीखने की योग्यता है। (Intelligence is the ability to learn.)
    5. बुद्धि पर्यावरण के साथ समायोजन करने की योग्यता है। (Intelligence is the ability to adapt to the environment.)
    6. बुद्धि अमूर्त्त चिंतन की योग्यता है। (Intelligence is the ability to think abstractly.)
    7. बुद्धि पूर्व अनुभवों एवं अर्जित ज्ञान से लाभ उठाने की योग्यता है। (Intelligence is the ability to benefit from past experiences and acquired knowledge.)
    8. बुद्धि समस्या समाधान की योग्यता है। (Intelligence is the ability to solve problems.)
    9. बुद्धि अनेक योग्यताओं का समुच्चय है। (Intelligence is a combination of many abilities.)
    10. बुद्धि संबंधों को समझने की शक्ति है। (Intelligence is the power to understand relationships.)
    11. बुद्धि चिंतन करने, तर्क करने और निर्णय करने की शक्ति है। (Intelligence is the power to think, reason, and make decisions.)
    12. बुद्धि का विकास जन्म से लेकर किशोरावस्था तक होता है। (Intelligence develops from birth to adolescence.)
    13. बुद्धि में आत्म निरीक्षण की शक्ति होती है । व्यक्ति द्वारा किये गए कर्मों और विचारों की आलोचना बुद्धि स्वयं करती है। (Intelligence has the power of self-observation. Intelligence itself criticizes the actions and thoughts of a person.)


    बुद्धि  के प्रकार (Types of Intelligence)

    मनोवैज्ञानिक थॉर्नडाइक (Thorndike) ने बुद्धि के तीन प्रकार बताए थे- गामक या यान्त्रिक बुद्धि  (Motor or Mechanical Intelligence), अमूर्त बुद्धि (Abstract Intelligence) और सामाजिक बुद्धि (Social Intelligence)। गैरेट (Garette) ने थॉर्नडाइक की गामक अथवा यान्त्रिक बुद्धि को मूर्त बुद्धि (Concrete Intelligence) की संज्ञा दी। वर्तमान में बुद्धि के ये ही तीन प्रकार माने जाते हैं-


    (1) मूर्त बुद्धि (Concrete Intelligence)—

    वह बुद्धि जो मनुष्यों को वस्तुओं के स्वरूप को समझने एवं तदनुकूल क्रिया करने में सहयोग करती है (It helps humans to understand the nature of things and act accordingly.), उसे गैरेट ने मूर्त बुद्धि (Concrete Intelligence) की संज्ञा दी। मूर्त बुद्धि इसलिए कि वह मूर्त वस्तुओं को समझने एवं मूर्त क्रियाओं को करने में सहायता करती है। इस प्रकार की बुद्धि को थॉर्नडाइक (Thorndike) ने गत्यात्मक बुद्धि (Motor Intelligence) या यान्त्रिक बुद्धि (Mechanical Intelligence) कहा था। जिन बच्चों में इस प्रकार की बुद्धि की अधिकता होती है, वे वस्तुओं को तोड़ने-जोड़ने में विशेष रुचि लेते हैं। अन्य शारीरिक कार्य; जैसे-खेल-कूद एवं नृत्य आदि में भी उनकी रुचि होती है। ऐसे बच्चे आगे चलकर कुशल कर्मकार और इंजीनियर बनते हैं।

    (2) अमूर्त बुद्धि (Abstract Intelligence)- 

    वह बुद्धि जो मनुष्यों को पुस्तकीय ज्ञान प्राप्त करने में, विभिन्न तथ्यों की जानकारी प्राप्त करने में, सोचने-समझने में और समस्याओं के समाधान खोजने में सहायता करती है (It helps humans to acquire bookish knowledge, to gain information about various facts, to think and understand and to find solutions to problems.) , उसे थॉर्नडाइक ने अमूर्त बुद्धि (Abstract Intelligence) की संज्ञा दी। अमूर्त बुद्धि इसलिए क्योंकि वह अमूर्त चिन्तन-मनन और समस्या समाधान (abstract thinking and problem solving) में सहायक होती है। जिन बच्चों में इस प्रकार की बुद्धि की अधिकता होती है, वे पुस्तक अध्ययन और चिन्तन-मनन में अधिक रुचि लेते हैं। ऐसे बच्चे आगे चलकर अच्छे वकील (Lawyer), डॉक्टर, अध्यापक, साहित्यकार (writer)  चित्रकार (painter) और दार्शनिक (Philosopher) बनते हैं।

    (3) सामाजिक बुद्धि (Social Intelligence)- 

    वह बुद्धि जो मनुष्यों को अपने समाज में समायोजन करने एवं सामाजिक कार्यों में भाग लेने में सहायता करती है (Helps humans adjust to their society and participate in social activities), उसे थॉर्नडाइक ने सामाजिक बुद्धि (Social Intelligence) की संज्ञा दी है। जिन बच्चों में इस प्रकार की बुद्धि की अधिकता होती है वे परिवार के सदस्यों, समाज के लोगों और विद्यालय के सहपाठियों के साथ समायोजन करते हैं और सामाजिक कार्यों (Social works) में रुचि लेते हैं। ऐसे बच्चे आगे चलकर अच्छे व्यवसायी (Businessman), समाज सेवक  एवं राजनेता (Social worker and politician) बनते हैं।


    बहुआयामी या बहुल बुद्धि (Multi-Dimensional or Multiple Intelligence)

    बहुआयामी बुद्धि का शाब्दिक अर्थ होता है, एक ही व्यक्ति के अन्दर विभिन्न प्रकार के कौशलों (Skills) का विकास होना। अर्थात् उसमें सामाजिक समझ (Social Understanding), राजनैतिक समझ (Political Understanding), समस्या समाधान (Problem Solving) से सम्बन्धित समझ तथा नेतृत्व (Leadership) का गुण इत्यादि का होना। मनोवैज्ञानिकों ने बहुल बुद्धि के बारे में निम्न परिभाषाएँ दी हैं -
    केली एवं थर्स्टन  ने बताया कि बुद्धि का निर्माण प्राथमिक मानसिक योग्यताओं के द्वारा होता है।

    केली (Kelly) के अनुसार, - “बुद्धि का निर्माण इन योग्यताओं से होता है वाचिक योग्यता (Verbal Ability), गामक योग्यता (Motor Ability), सांख्यिक योग्यता (Statistical Ability), यान्त्रिक योग्यता (Mechanical Ability), सामाजिक योग्यता (Social Ability), संगीतात्मक योग्यता (Musical Ability), स्थानिक सम्बन्धों (spatial relations) के साथ उचित ढंग से व्यवहार करने की योग्यता, रुचि और शारीरिक योग्यता।”

    थर्स्टन (Thurston) के अनुसार-  “बुद्धि इन प्राथमिक मानसिक योग्यताओं (primary mental abilities) का समूह होता है प्रत्यक्षीकरण सम्बन्धी योग्यता (Perception related ability), तार्किक योग्यता (Reasoning ability) , सांख्यिकी योग्यता (Statistical Ability) समस्या समाधान की योग्यता (Problem Solving Ability), स्मृति सम्बन्धी योग्यता (Memory related ability)।” 

    कुछ मनोवैज्ञानिकों ने केली एवं थर्स्टन के बुद्धि सिद्धान्तों की आलोचना की, किन्तु अधिकतर मनोवैज्ञानिकों ने यह भी माना कि बुद्धि का बहुआयामी होना निश्चित रूप से सम्भव है। बहुआयामी बुद्धि होने के कारण ही कुछ लोग अनेक प्रकार के कौशलों में निपुण होते हैं।


    संवेगात्मक बुद्धि (Emotional Intelligence)

     सांवेगिक बुद्धि जैसे पद का प्रतिपादन  सेलोवी तथा मेयर (Salovey & Mayer, 1970) ने किया, किन्तु इसकी वैज्ञानिक एवं सैद्धान्तिक व्याख्या (scientific & theoretical explanation)  गोलमैन (Goleman, 1998) द्वारा दी गई है।

    गोलमैन ने इस सम्प्रत्यय (Concept) की व्याख्या अपनी बहुचर्चित पुस्तक 'Emotional Intelligence: Why It Can Matter More than IQ) में की है जिसमें उन्होंने स्पष्टत: यह दावा किया कि व्यक्ति को जिन्दगी में जो सफलताएँ मिलती हैं, उनका 20% ही बुद्धि-लब्धि (Intelligence Quotient) के कारण होता है और शेष 80% सफलता का कारण (Reason for success) सांवेगिक बुद्धि (Emotional Intelligence or EQ) होता है।

    गोलमैन (Goleman, 1994) ने सांवेगिक बुद्धि को परिभाषित करते हुए यह कहा है कि यह दूसरों एवं स्वयं के भावों (Emotions) को पहचानने की क्षमता तथा अपने आपको अभिप्रेरित (Motivate) करने एवं  अपने सम्बन्धों में संवेग को प्रबन्धित करने की क्षमता है। 
    गोलमैन ने अपने सिद्धान्त में यह भी स्पष्ट किया है कि ये सांवेगिक क्षमताएँ व्यक्ति को अपनी जिन्दगी के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में सफलता प्रदान करने में काफी सहायता करती हैं, इसलिए गोलमैन ने अपने सांवेगिक बुद्धि के इस मॉडल को 'निष्पादन का सिद्धान्त'(principle of performance) कहकर पुकारना पसन्द किया है।






    शैक्षिक मनोविज्ञान की विधियाँ (Methods of Educational Psychology)

     शैक्षिक मनोविज्ञान की विधियाँ (Methods of Educational Psychology) शैक्षिक मनोविज्ञान में विद्यार्थियों के व्यवहार (Behaviour), सीखने की प्र...