मनोविज्ञान का विकास (Development of Psychology)
मनोविज्ञान का विकास निम्न चरणों मे हुआ है -
- मनोविज्ञान आत्मा का विज्ञान है (Psychology is the science of soul) -
- प्लेटो के अनुसार आत्मा शरीर से भिन्न, अमर और शाश्वत (immortal and eternal) है; शरीर नष्ट हो जाता है, पर आत्मा जन्म से पहले भी होती है और मृत्यु के बाद भी रहती है।
- आत्मा को जीवन, ज्ञान, विचार, स्मृति, संवेदना और नैतिक निर्णय का स्रोत माना गया, इसलिए सच्चाई और अच्छाई की खोज आत्मा का मूल कार्य है।
- बुद्धि (Reason) – तर्क, ज्ञान और सत्य की ओर ले जाने वाला भाग।
- उदात्त/साहसी भाग (Spirit) – सम्मान, साहस, क्रोध, आत्मसम्मान आदि से जुड़ा भाग।
- इच्छात्मक भाग (Appetite) – भौतिक इच्छाएँ, भूख-प्यास, भोग आदि से सम्बंधित भाग।
- मनोविज्ञान मन का विज्ञान है (Psychology is the Science of Mind) -
17वीं शताब्दी के प्रारम्भ में कुछ पाश्चात्य दार्शनिकों (Western philosophers) ने मनुष्य की समस्त क्रियाओं का आधार उसके मन (Mind) को बताया। इनमें इटली के दार्शनिक पोम्पोनाजी (Poimponazzi) का नाम उल्लेखनीय है। लीबनीज (Leibnitez), हॉब्स (Hobbes), लॉक (Locke) और कान्ट (Kant) भी इसी मत के समर्थक थे। जो यह मानकर चलते हैं कि मनोविज्ञान का मुख्य विषय “मन” यानी मानसिक प्रक्रियाएँ हैं। मन से आशय सोच (thinking), स्मृति (memory), कल्पना (imagination), तर्क (reasoning), निर्णय (decision‑making) और भावनाओं (emotions) जैसी सभी आंतरिक प्रक्रियाओं से है, इसलिए इसे science of mind कहा गया। तब से इस प्रकार के चिन्तन को मन का विज्ञान (Science of Mind) कहा गया। परन्तु पाश्चात्य दार्शनिकों के सामने मन सम्प्रत्यय (Concept) को स्पष्ट करने में भी वे सब बाधाएँ उत्पन्न हुई जो आत्मा का सम्प्रत्यय स्पष्ट करने में उत्पन्न हुई थीं। अतः आगे चलकर इसे मन का विज्ञान भी नहीं माना गया।
- मनोविज्ञान चेतना का विज्ञान है (Psychology is the Science of Consciousness)-
19वीं शताब्दी के प्रारम्भ में कुछ पाश्चात्य चिन्तकों ने मनुष्य की समस्त क्रियाओं का आधार उसकी चेतना (Consciousness) को बताया। इनमें अमेरिका के विलियम जेम्स (William James) और जर्मनी के विलियम वुन्ट (Wilhelm Wundt) मुख्य हैं। इनका तर्क था कि मनुष्य की सभी क्रियायें उसकी चेतना से नियन्त्रित होती हैं, इस दृष्टिकोण के अनुसार मनोविज्ञान का मुख्य कार्य चेतन अनुभूतियों (conscious experiences) की अवस्थाओं – जैसे संवेदना, अनुभूति, भाव, विचार, इच्छाएँ (sensations, perceptions, feelings, thoughts and desires) – का सूक्ष्म आत्म‑निरीक्षण (introspection) के माध्यम से वैज्ञानिक अध्ययन और विश्लेषण करना है। अतः इस प्रकार के चिन्तन को चेतना का विज्ञान (Science of Consciousness माना जाना चाहिए। विलियम जेम्स संसार के पहले चिन्तक हैं जिन्होंने मनोविज्ञान को दर्शन से अलग कर एक स्वतन्त्र अनुशासन (Discipline) का रूप प्रदान किया और मनोविज्ञान प्रयोगशाला स्थापित कर प्रायोगिक मनोविज्ञान की शुरूआत की। पाश्चात्य जगत में विलियम जेम्स वर्तमान मनोविज्ञान के जनक माने जाते हैं। हालांकि बाद में यह आपत्ति उठी कि चेतना केवल वही दिखाती है जो व्यक्ति को स्वयं ज्ञात है, जबकि अवचेतन , अचेतन प्रक्रियाएँ (subconscious and unconscious processes) और प्रत्यक्ष दिखाई देने वाला व्यवहार (behavior) भी मनोविज्ञान के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसी सीमा के कारण “मनोविज्ञान चेतना का विज्ञान है” वाली परिभाषा को पर्याप्त नहीं माना गया।
- मनोविज्ञान चेतना तथा अचेतना का विज्ञान है (Psychology is the Science of consciousness and Unconsciousness)-
मनोवैज्ञानिक फ्रायड (Freud) तथा जुंग (Jung) ने अपने प्रयोगों के आधार अवचेतन और अचेतन प्रक्रियाओं को भी अध्ययन‑विषय मान लिया। यह विशेष रूप से फ्रायड और मनोविश्लेषणवादी दृष्टिकोण से जुड़ा है, जिन्होंने बताया कि हमारे बहुत‑से विचार, इच्छाएँ, भय और स्मृतियाँ चेतन स्तर पर नहीं रहते, फिर भी व्यवहार को गहराई से प्रभावित करते हैं। उन्होंने बताया कि मन के दो भाग है- चेतन (Conscious) तथा अचेतन (Unconscious)। मानव चेतन मन (Conscious mind) के 1/10 भाग का प्रतिनिधित्व करता है जबकि 9/10 भाग का प्रतिनिधित्व अचेतन मन (unconscious mind) करता है। अतः उन्होंने मनोविज्ञान को चेतन तथा अचेतन मन का अध्ययन करने वाले विज्ञान के रूप में परिभाषित किया।
- मनोविज्ञान व्यवहार का विज्ञान है (Psychology is the science of behaviour)-
20 वीं शताब्दी में जीव वैज्ञानिकों (Biologists), शरीर वैज्ञानिकों (Physiologists) और मनोचिकित्सकों (Psychiatrists) ने मनोविज्ञान के विकास में बड़ा योगदान दिया। प्रमुख प्रतिनिधि जॉन बी. वाटसन, मैक्डूगल, वुडवर्थ आदि माने जाते हैं। इस विचार के अनुसार मन, आत्मा या केवल चेतना को प्रत्यक्ष रूप से न तो देखा जा सकता है, न मापा जा सकता है; इसलिए मनोविज्ञान का वास्तविक और विश्वसनीय विषय वह है जो प्रत्यक्ष दिखाई दे और जिसे मापा‑परखा जा सके – अर्थात व्यवहार। यह मनुष्य के अन्तरिक (Internal) तथा बाह्य (External) व्यवहार के विज्ञान के रूप में प्रतिष्ठित हुआ। तब से मनोविज्ञान को व्यवहार का विज्ञान माना जाता है।
व्यवहारवादी कहते हैं कि व्यक्ति और पशु दोनों ही अपने वातावरण के प्रति जो भी क्रियाएँ, प्रतिक्रियाएँ, बोल‑चाल, हाव‑भाव, सीखना, कार्य‑निष्पादन (Actions, reactions, speech, gestures, learning and performance) आदि दिखाते हैं, वही उनका व्यवहार है और मनोविज्ञान का काम इन्हीं का वैज्ञानिक अध्ययन करना है।
वाटसन ने मनोविज्ञान को “behavior का निश्चित या शुद्ध science” कहा; वुडवर्थ ने “environment के सम्पर्क में होने वाले मानव व्यवहारों का science” और मैक्डूगल ने “आचरण एवं व्यवहार का यथार्थ science” कहा, जिससे स्पष्ट है कि केंद्र में observable behaviour है, न कि रहस्यमय “मन (Mind) ” या “आत्मा (Soul)”।
कॉलेसनिक के अनुसार "मनोविज्ञान मानव व्यवहार का विज्ञान है।"
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