व्यवहार का अर्थ (Meaning of Behaviour)
साधारण अर्थ में व्यवहार किसी उत्तेजना (Stimulus) के फलस्वरूप अनुक्रिया (Response) होती है। व्यवहारवादियों का मत है कि बाह्य व्यवहार स्वतंत्र उत्तेजक (Independent Stimulus) और प्रतिक्रिया सम्बन्धों (Response Connections) की जटिल प्रणाली पर आधारित है। इनके अनुसार मानसिक क्रिया केवल बाहय उत्तेजना की अनुक्रिया मात्र है। व्यवहारवादियों ने इस तथ्य को निम्नलिखित सूत्र के रूप में व्यक्त किया है-
उत्तेजक (Stimulus) → प्राणी(Organism) → अनुक्रिया (Response)
व्यवहार शब्द के व्यापक अर्थ तथा पूर्ण स्वरूप के संदर्भ में निम्न प्रकार से व्याख्या की जा सकती है-
- वुडवर्थ (Woodworth, 1945) के अनुसार, "जीवन की कोई भी अभिव्यक्ति एक क्रिया है।" ("Any manifestation of life is activity.") और ऐसी सभी क्रियाओं के सम्मिलित रूप को व्यवहार की संज्ञा दी जा सकती है। इसलिए व्यवहार शब्द में केवल चलना, तैरना, नाचना आदि इन्द्रियजनित क्रियाएँ (Sensory activities) ही नहीं बल्कि सोचना, विचारना, कल्पना करना (Thinking, contemplating, imagining) आदि मस्तिष्क सम्बन्धी और प्रसन्न होना, उदास होना, क्रोधित होना आदि भाव और अनुभूति सम्बन्धी क्रियाएँ (cognitive activities) भी शामिल हैं।
- मानव मस्तिष्क का चेतन (Conscious) ही नहीं बल्कि अचेतन (unconscious)और अर्धचेतन (sub-conscious) रूप भी मानव व्यवहार को प्रभावित करता है। अतः व्यवहार शब्द का क्षेत्र, प्रत्यक्ष रूप में दिखाई देने वाले ऊपरी व्यवहार तक ही सीमित नहीं है। आंतरिक अनुभवों और मानसिक प्रक्रियाओं (Internal experiences and mental processes) से युक्त अप्रत्यक्ष (unobserved) एवं आंतरिक व्यवहार भी इसमें शामिल हैं।
- मनोविज्ञान में समस्त जीवधारियों (Organisms) के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है। इसलिए व्यवहार शब्द में केवल मानव व्यवहार ही नहीं बल्कि पशु-पक्षियों तथा वनस्पति वर्ग (Animals, birds and plant kingdom) तक के व्यवहार को शामिल किया जाता है। मानव समाज में भी केवल सामान्य व्यक्तियों का नहीं बल्कि असामान्य और बच्चों, युवकों तथा प्रौढ़ों, सभी का व्यवहार 'व्यवहार' शब्द में शामिल है।
इस प्रकार से 'व्यवहार' शब्द अपने आप में बहुत व्यापक है। इसमें जीवधारियों की सभी प्रकार की जीवन सम्बन्धी क्रियाएँ सम्मिलित हैं। मुख्यतः दो प्रकार का व्यवहार होता है -
- जन्मजात / प्राकृतिक व्यवहार (Innate/Natural behavior): जो जन्म से ही मौजूद हों, जिनके लिए अलग से सीखने या प्रशिक्षण की ज़रूरत न हो, जैसे रोना, भूख लगने पर प्रतिक्रिया, डर लगना आदि।
- शिक्षित / अर्जित व्यवहार (Learned/Acquired behavior): जो व्यक्ति अभ्यास, अनुभव, शिक्षा और प्रशिक्षण से सीखता (learns through practice, experience, education and training) है, जैसे भाषा‑व्यवहार, सामाजिक शिष्टाचार, पढ़ाई की आदतें, व्यावसायिक कौशल आदि (Such as language behavior, social etiquette, study habits, professional skills etc.)
मानव व्यवहार को कई प्रकार के आंतरिक (जैविक‑मनोवैज्ञानिक) और बाह्य (सामाजिक‑पर्यावरणीय) कारक मिलकर प्रभावित करते हैं-
- आनुवंशिक / जैविक कारक (Genetic/Biological Factors): माता‑पिता से मिलने वाले गुणसूत्रों (chromosomes) के माध्यम से शारीरिक बनावट, तंत्रिका तंत्र, स्वभाव की मूल प्रवृत्तियाँ (Physical characteristics, nervous system and basic temperament) आदि व्यवहार की दिशा तय करते हैं। बुद्धि‑स्तर, मज़बूत या कमजोर स्वास्थ्य, संवेदनशीलता (Intelligence level, strong or weak health, sensitivity) आदि भी व्यक्ति के प्रतिक्रिया ‑ढंग और व्यवहार को प्रभावित करते हैं।
- मनोवैज्ञानिक कारक (Psychological Factors): अभिप्रेरणा, रुचि, अभिरुचि, भावनाएँ, दृष्टिकोण, आदतें, आत्म‑सम्मान, संघर्ष (Motivation, interests, aptitudes, emotions, attitudes, habits, self-esteem, conflicts) आदि व्यक्ति के सोचने और प्रतिक्रिया देने के तरीके को निर्धारित करते हैं। मानसिक स्वास्थ्य या विकार (Mental health or disorders) (जैसे तीव्र चिंता, अवसाद, आक्रामक प्रवृत्ति (acute anxiety, depression, aggressive tendencies)) भी व्यवहार में स्पष्ट परिवर्तन ला सकते हैं।
- सामाजिक‑सांस्कृतिक कारक (Socio-Cultural Factors): परिवार की संरचना, माता‑पिता का व्यवहार, मित्र‑समूह, पड़ोस, विद्यालय, कार्य‑स्थल (Family structure, parental behavior, peer groups, neighborhood, school, workplace) आदि सामाजिक वातावरण व्यवहार को गढ़ते हैं। परंपराएँ, रीति‑रिवाज, मूल्य, धर्म, मीडिया, आर्थिक‑सामाजिक स्थिति (Traditions, customs, values, religion, media, socio-economic status) आदि संस्कृति‑सम्बन्धी तत्व भी व्यक्ति के बर्ताव की शैली तय करते हैं।
- पर्यावरण और परिस्थितियाँ (Environment and Circumstances): भौतिक वातावरण (भीड़, शोर, तापमान, संसाधन‑अभाव/उपलब्धता) (physical environment (crowding, noise, temperature, resource scarcity/availability)) के अनुसार व्यक्ति अपना व्यवहार बदलता है। विशेष जीवन‑अनुभव, संकट, सफलता‑असफलता, युद्ध, महामारी, दुर्घटना (Specific life experiences, crises, successes and failures, war, pandemics, accidents) आदि परिस्थितिजन्य कारक दीर्घकालिक व्यवहार परिवर्तन ला सकते हैं।
- शिक्षा और अधिगम (Education and Learning): शिक्षा‑स्तर, शैक्षिक अनुभव, शिक्षक का दृष्टिकोण, कक्षा‑वातावरण, पुरस्कार‑दण्ड की प्रणाली (level of education, educational experiences, teacher's approach, classroom environment, and reward and punishment systems) से व्यक्ति के सामाजिक, नैतिक और बौद्धिक व्यवहार का विकास होता है। प्रशिक्षण, परामर्श, अनुकरण (मॉडलिंग) और लगातार अभ्यास (Training, counseling, modeling and consistent practice) से वांछनीय व्यवहार सुदृढ़ तथा अवांछनीय व्यवहार कमजोर (Reinforce desirable behaviors and weaken undesirable ones) किया जा सकता है।

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