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Sunday, July 25, 2021
व्यक्तित्व का अर्थ एवं परिभाषायें (Meaning and Definitions of Personality)
Friday, July 23, 2021
माध्यमिक शिक्षा की समस्या- तीन भाषाओं का अध्ययन (Study three Language)
तीन भाषाओं का अध्ययन ( Study of three Language)
सरकार की भाषा-संबंधी नीति ने माध्यमिक शिक्षा में एक अवांछनीय समस्या उत्पन्न कर दी है। कुछ सीमा तब उस नीति का सूत्रपात मुदालियर आयोग ने किया। उसने यह सुझाव दिया कि निम्न और उच्च माध्यमिक स्तरों पर छात्रों द्वारा दो भाषाओं का अध्ययन किया जाय। कोठारी आयोग ने इस सुझाव में संशोधन करके यह विचार दिया कि निम्न माध्यमिक स्तर पर तीन भाषाओं का और उच्च माध्यमिक स्तर पर दो भाषाओं का अध्ययन किया जाय। भारत सरकार ने इन दोनों आयोगों के विचारों के आधार पर त्रिभाषा सूत्र प्रतिपादित किया है। उसने अपनी राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्पष्ट कर दिया है कि माध्यमिक स्तर पर छात्रों के लिये तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य है. ये भाषाएं इस प्रकार है-
1. हिंदी भाषी राज्यों में- हिंदी, अंग्रेजी और एक आधुनिक भारतीय भाषा जिसमें दक्षिण की कोई भी भाषा होनी चाहिए।
2. अहिंदी भाषी राज्यों में- हिंदी, क्षेत्रीय भाषा और अंग्रेजी।
समाधान-
माध्यमिक शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों की आयु एवं आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उचित तो यही जान पड़ता है कि उनके लिए दो भाषाओं का अध्ययन बहुत काफी है। तीन भाषाओं के अध्ययन से दुष्परिणाम हो सकते हैं। या तो वह इन तीन भाषाओं का अध्ययन करें या इनका पूर्ण अध्ययन करने के लिए अन्य विषयों का अधूरा अध्ययन करें। यह दोनों बातें स्पष्ट रूप से उसकी हित के प्रतिकूल हैं। दो भाषाओं का अध्ययन निम्नलिखित प्रकार से किया जा सकता है-
1. हिंदी भाषी राज्यों में- हिंदी और एक आधुनिक भारतीय भाषा।
2. अहिंदी भाषी राज्यों में- मातृभाषा और हिंदी।
महात्मा गांधी जी की विचार के अनुसार आज अंग्रेजी निसंदेह रूप से विश्व की भाषा है। अतः मैं इसे विद्यालय के पाठ्यक्रम में नहीं बल्कि विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में द्वितीय वैकल्पिक भाषा का स्थान दूंगा।
Monday, July 19, 2021
बुद्धि-परीक्षणों की उपयोगिता (Utility of Intelligence Tests)
बुद्धि-परीक्षणों की उपयोगिता (Utility of Intelligence Tests)
शिक्षा के क्षेत्र में बुद्धि-परीक्षणों का महत्वपूर्ण स्थान है। आधुनिक शिक्षा शास्त्रियों के अनुसार बालक को केन्द्र मानकर शिक्षा देना चाहिए। इसलिए बालक की बुद्धि और योग्यता को ध्यान में रखते हुए शिक्षा प्रदान करना आवश्यक हो जाता है । इस दृष्टि से बुद्धि परीक्षण शिक्षा का महत्वपूर्ण साधन बन गयी है । शिक्षा में बुद्धि परीक्षणों की उपयोगिता निम्न है -
1. किसी कक्षा प्रवेश के लिए (Admission in a Particular Class)- बुद्धि परीक्षणों की सहायता से यह पता लगाया जा सकता है कि कोई बालक किसी कक्षा विशेष में प्रवेश लेने योग्य बुद्धि रखता है अथवा नहीं।
2. छात्रों का वर्गीकरण (Classification of Students)- बुद्धि परीक्षणों की सहायता से बच्चों को उनके मानसिक स्तर के अनुसार अलग-अलग वर्गों में बाँटकर उनके मानसिक स्तर के अनुसार पाठ्यक्रम, अध्यापक तथा शिक्षण विधि की व्यवस्था की जा सकती है ।
3. शैक्षिक रूप से पिछड़े तथा अतिग्राही बालकों का पता लगाना (To know the under and over achiever students)- बुद्धि-लब्धि तथा शैक्षिक उपलब्धि (Academic Achievement ) का पता लगाकर अध्यापक यह जानने में सक्षम होता है कि छात्र अपनी योग्यता अनुसार प्राप्तांक ला पा रहे हैं अथवा नहीं यदि उनकी मानसिक योग्यता के अनुरूप उपलब्धि नहीं है तो उनका उपचार किया जाता है।
4. शैक्षिक दुर्बलता का निदान (Diagnosis of educational weakness)– प्रायः यह देखने में आता है कि अधिक प्रतिभावान छात्र तथा मन्द बुद्धि छात्र पाठ्यक्रम के प्रति उदासीनता दिखाते हैं जिससे वे पढ़ने में कमजोर हो जाते हैं। अतः शिक्षक को ऐसे छात्रों का पता लगाकर उनकी शैक्षिक दुर्बलता को दूर करने का प्रयास करना चाहिये।
5. कक्षोन्नति (Class Promotion) — छात्रों को किसी कक्षा में प्रमोट करने से पहले उसकी बुद्धि-लब्धि का पता लगाकर ही निर्णय करना चाहिये ताकि आगे चलकर उनको पाठ्यक्रम बोझ (burden) न लगे।
6. कक्षा अनुशासन (Maintaining Discipline in Classroom)– प्रायः देखने में आता है कि अधिक तीव्र बुद्धि तथा अधिक मन्द बुद्धि छात्र कक्षा में अध्यापक के शिक्षण स्तर से सन्तुष्ट नहीं होते हैं तथा कक्षा में उदण्डता करते हैं। ऐसे छात्रों की पहचान करके शिक्षकों को ऐसे छात्रों पर विशेष ध्यान देकर उनकी जिज्ञासा को शान्त करने का प्रयास करना चाहिये।
7. शैक्षिक निर्देशन (Educational Guidance)- बच्चों को उनके मानसिक स्तर के अनुसार विभिन्न पाठ्यक्रम चुनने के लिए निर्देशन दिया जा सकता है।
8. व्यावसायिक निर्देशन (Vocational Guidance)- विभिन्न व्यवसाय अथवा पद (Post) के लिए न्यूनतम बौद्धिक स्तर की आवश्यकता होती है। परीक्षण के आधार पर उनको व्यावसायिक निर्देशन दिया जाता है ।
9. अभिभावकों के लिए निर्देशन (Guidance for Guardians)— छात्रों के अभिभावकों को छात्रों के बुद्धि स्तर का ज्ञान कराने से उन्हें इस बात का परामर्श दिया जा सकता है कि उनके बच्चे किस पाठ्यक्रम में अधिक सफल होंगे।
10. शिक्षक के कार्य की जाँच (Judging Teacher Work) — बालकों की बुद्धि-लब्धि तथा शैक्षिक लब्धि के आधार पर शिक्षक के कार्य का मूल्यांकन भी किया जा सकता है।
11. भविष्यवाणी करना (Prediction)- बुद्धि-लब्धि के आधार पर छात्रों की किसी क्षेत्र विशेष में भावी सफलता की भविष्यवाणी की जा सकती है।
12. छात्रवृत्ति देने का निर्णय करने में सहायता (Help Deciding to Award a Scholarship)- इन परीक्षाओं से बुद्धि-परीक्षण करके योग्य छात्रों को छात्रवृत्ति देने में सहायता ली जा सकती है।
13. शिक्षा में अपव्यय का निवारण (Prevention of wastage in education)- प्रायः विद्यालयों में अनेक बालक परीक्षाओं में अनुत्तीर्ण होने पर पढ़ाई स्थगित कर देते हैं। इसलिए इस अपव्यय को दूर करने के लिए बुद्धि-परीक्षाणों द्वारा बालकों की योग्यताओं का ज्ञान प्राप्त करके, उन्हें पाठ्यविषयों का चुनाव करने में सहायता दी जा सकती है।
14. अनुसन्धान के क्षेत्र में सहायता (Assistance in research) - शिक्षा एवं मनोविज्ञान के क्षेत्र में होने वाले अनुसंधानों में भी इसका प्रयोग किया जाता है विशेषकर बुद्धि से सम्बंधित कारकों की खोज करने में एवं मनोवैज्ञानिक गुणों के बारे में ज्ञात करने में इनका प्रयोग किया जाता है ।
15. सैन्य क्षेत्र में उपयोग (Use in military) - सैन्य क्षेत्र में सैनिकों एवं सैन्य अधिकारियों के चयन में भी इनका उपयोग बहुत पहले से किया जा रहा है । प्रथम विश्वयुद्ध में थर्स्टन ने सैनिकों की भर्ती हेतु आर्मी एल्फा तथा आर्मी बीटा बुद्धि परीक्षण का प्रयोग किया था ।
Sunday, July 18, 2021
अशाब्दिक अथवा निष्पादन सामूहिक बुद्धि परीक्षण (Non-verbal or Performance Group Intelligence Test)
अशाब्दिक अथवा निष्पादन सामूहिक बुद्धि परीक्षण (Non-verbal or Performance Group Intelligence Test)
रेविन्स प्रोग्रेसिव मैट्रिक्स (Raven's Progressive Matrices)
1. परीक्षण निर्माता का नाम- जे. सी. रेविन
2. मापे जाने वाला गुण - सामान्य बुद्धि - G
3.. उपयोगिता - इस परीक्षण के तीन प्रकार (Forms) हैं-
(i) स्टैन्डर्ड प्रोग्रेसिव मैट्रिक्स (S.P.M. 1957)- यह 6 वर्ष के बालकों से लेकर प्रौढ़ावस्था तक के व्यक्ति की बुद्धि मापन के लिए है।
(ii) एडवान्स्ड प्रोग्रेसिव मैट्रिक्स (A.P.M., 1965)- यह 11½ वर्ष के बालकों से लेकर 40 वर्ष तक के उन प्रौढ़ों की बुद्धि मापन के लिए उपयोगी है जिनकी बुद्धि उच्च होती है।
(iii) कलर्ड प्रोग्रेसिव मैट्रिक्स (C.P.M., 1967)– इसका उपयोग 5½ वर्ष से लेकर 11½ वर्ष की आयु तक के बालकों की बुद्धि मापन के लिए अधिक उपयोगी है।
4. प्रश्नों (पदों, Items) की संख्या - इस परीक्षण के तीनों प्रकार (Form) में प्रश्नों की संख्या निम्न है-
(A) S.P.M में 5 सैट (Sets) हैं तथा प्रत्येक सेट में 12 प्रश्न हैं, कुल 60 प्रश्न हैं ।
(B) A.P.M. में 2 सैट (Sets) हैं, प्रथम सेट में 12 तथा दूसरे में 36 प्रश्न हैं, कुल 48 प्रश्न हैं ।
(C) C. P. M. में 3 सैट (Sets) हैं तथा प्रत्येक सेट में 12 प्रश्न हैं, कुल 36 प्रश्न हैं ।
5. परीक्षण का प्रशासन (Administration of the Test) - इसमें S.P.M. (Standard Progressive Matrices) के प्रशासन को लेते हैं ।
(1) सर्वप्रथम प्रयोज्यों (परीक्षार्थियों) को एक कमरे में अलग-अलग सीटों पर आराम से बैठा दिया जाता है, इतनी अधिक दूरी पर कि वे एक-दूसरे की सहायता न कर सकें और न ही नकल कर सकें।
(2) इसके बाद उन्हें उत्तर-पत्र वितरित किए जाते हैं।
(3) अब उन्हें परीक्षण पुस्तिका (Test Booklet ) के नमूने (Sample) के प्रश्न ( पद, Item) को दिखाया जाता है और निर्देश दिया जाता है-
- इस पृष्ठ पर ऊपर के भाग में एक डिजाइन बना है। इसमें से दाईं ओर से एक टुकड़ा काटकर निकाल दिया है।
- अब पृष्ठ के नीचे के भाग को देखो। इसमें 6 डिजाइन हैं। इनमें एक डिजाइन ऐसा है जिसे उठाकर यदि ऊपर के चित्र की खाली जगह में लगा दे तो खाली जगह ठीक-ठीक भर जायेगी और ऊपर का डिजाइन भी पूरा हो जाएगा। बताओ वह कौन-सी आकृति है ? प्रयोज्य देखेंगे और सोचेंगे। तभी परीक्षणकर्त्ता उन्हें बताए कि यह आकृति नं० 4 है।
- बच्चों, इस परीक्षण पुस्तिका में इसी प्रकार के डिजाइन हैं। सबसे पहले पहला पृष्ठ खोलना है, डिजाइन देखना है फिर उसकी खाली जगह में भरे जाने वाले डिजाइन का नं० लिखना है। उसके बाद क्रमशः दूसरा, तीसरा एवं अन्य पृष्ठ खोलना और उनके डिजाइनों को पूरा करने वाले डिजाइनों के नम्बर को लिखना है। इस परीक्षण पुस्तिका के प्रश्नों का उत्तर देने के लिए 40 मिनट का समय है।
6. परीक्षण का फलांकन (Test Score) - इस परीक्षण के मूल मानक ब्रिटेन के हैं क्योंकि इसका मानकीकरण ब्रिटेन के 6 वर्ष के बालकों से लेकर 65 वर्ष तक के व्यक्तियों के न्यादर्श (Sample) पर किया गया है परन्तु अब इसके अन्तर्राष्ट्रीय मानक भी बन गए हैं और अपने देश भारत भी के लिए इसके मानक बना दिए हैं। परीक्षण पर प्राप्त प्राप्तांकों से बुद्धि-लब्धि की गणना मैनुअल (Manual) द्वारा ज्ञात की जाती है ।
शाब्दिक सामूहिक बुद्धि परीक्षण (Verbal Group Intelligence Test)
शाब्दिक सामूहिक बुद्धि परीक्षण (Verbal Group Intelligence Test)
(General Mental Ability Test)
1. परीक्षण निर्माता का नाम-. डॉ० एस० जलोटा ।(पंजाब विश्वविद्यालय के प्रोफेसर)
2. मापे जाने वाला गुण-. सामान्य बुद्धि-G
3. उपयोगिता - यह परीक्षण 13 वर्ष से 16 वर्ष या 8 से 11वीं कक्षा के बालकों की सामान्य बुद्धि के मापन के लिए है।
4. प्रश्नों (पदों , Items) की संख्या- इस परीक्षण में कुल 100 प्रश्न हैं। ये प्रश्न 7 प्रकार के हैं-
(i) समानार्थी शब्द (Synonyms)
(ii) विलोम शब्द (Antonyms)
(iii) संख्या श्रेणी (Number Series)
(iv) वर्गीकरण (Classification)
(v) सर्वोत्तम उत्तर (Best Answers)
(vi) निष्कर्ष (Inferences)
(vii) सादृश्यता (Analogies)
5.. परीक्षण का प्रशासन (Administration of the Test)-. इस परीक्षण का प्रशासन निम्न रूप में किया जाता है-
(1) सर्वप्रथम एक शान्त कमरे में प्रयोज्यों (बालकों) के बैठने की व्यवस्था की जाती है। प्रत्येक बालक की सीट दूसरे बालक की सीट से इतनी दूरी पर रखी जाती है कि कोई भी बालक दूसरे बालक से न बातचीत कर सके और न उसकी नकल कर सके।
(2) इसके बाद उन्हें कमरे में उनके लिए निश्चित सीटों पर बैठाया जाता है और इससे पहले कि उन्हें परीक्षण दिया जाए उनके साथ सम्बन्ध (Relation) स्थापित किया जाता है ।
(3) जब बच्चे सामान्य मानसिक स्थिति में आ जाते हैं तो उन्हें आवश्यक निर्देश दिए जाते हैं और फिर उन्हें परीक्षण पत्र वितरित कर दिए जाते हैं।
(4) परीक्षणकर्ता यह देखता है कि सभी प्रयोज्य अपना-अपना कार्य स्वतन्त्र रूप से करते हैं, न तो कोई किसी से कुछ पूछता है और न ही किसी की नकल करता है। इस कार्य में परीक्षणकर्ता अपने सहयोगियों का सहयोग ले सकता है
(5) निश्चित समय के बाद ये परीक्षण पत्र वापिस ले लिए जाते हैं।
6. परीक्षण का फलांकन (Test Score)-
छात्रों द्वारा दिये गये उत्तरों पर अंक प्रदान किए जाते हैं। प्राप्तांकों के आधार पर बच्चों की मानसिक आयु ज्ञात की जाती है। इसके बाद उनकी मानसिक आयु और वास्तविक आयु के अनुपात को 100 से गुणा करके उनकी बुद्धि-लब्धि ज्ञात की जाती है । अन्त में इस बुद्धि-लब्धि के आधार वर्गीकरण किया जाता है।
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