Thursday, November 20, 2025

व्यक्तित्व का मापन (Measurement of Personality)

 व्यक्तित्व का मापन (Measurement of Personality)

व्यक्तित्व मापन की विधियां (Methods of Personality Measurement)

  1. अप्रक्षेपी विधियां (Non-Projectives Methods)
  2. प्रक्षेपी विधियां (Projective Method)

अप्रक्षेपी विधियां (Non-Projective Methods):

मुख्य रूप से व्यक्तित्व मापन की उन विधियों को कहते हैं जिनमें व्यक्ति के बाहरी व्यवहार या स्वयं द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है। इनमें दो प्रमुख प्रकार की विधियां होती हैं: वस्तुनिष्ठ विधि और आत्मनिष्ठ विधि
  • व्यक्तिनिष्ठ विधियाँ (Subjective Methods):- व्यक्तिनिष्ठ विधियों से तात्पर्य उन विधियों से है जिनमे परिणाम मापनकर्ता की अपनी पसंद- नापसंद और व्यक्तिगत मानदंडों से प्रभावित होते हैं।  अवलोकन विधि (Observation Method), साक्षात्कार विधि (Interview Method), प्रश्नावली विधि (Questionnaire Method),  व्यक्ति इतिहास विधि (Case History Method), आत्मकथा विधि (Autobiography Method) आदि इसके अंतर्गत आते हैं । 
  • वस्तुनिष्ठ विधियां (Objectives Methods): - वास्तुनिष्ठ विधियों से तात्पर्य उन विधियों से है जिनमे परिणाम मापनकर्ता की अपनी पसंद- नापसंद और व्यक्तिगत मानदंडों से प्रभावित नहीं होते हैं। नियन्त्रित निरीक्षण विधि (Controlled Observation Method), श्रेणी मापनी (Rating Scale), शारीरिक परीक्षण (Physiological Tests), परिस्थिति परीक्षण (Situation Tests) - समाजमिति (Sociometry), मनोनाटक (Psycho Drama) आदि। 

प्रक्षेपी विधियां (Projective Methods):-

व्यक्तित्व मापन की ऐसी विधियां हैं जिनमें व्यक्ति के अचेतन मन में छिपे पहलुओं, भावनाओं, विचारों और मानसिक स्थितियों  (unconscious mind, feelings, thoughts, and mental states) को प्रकट करने का प्रयास किया जाता है। इन विधियों में व्यक्ति को अस्पष्ट, अनिर्दिष्ट और संवेदी उत्तेजनाएं (vague, unspecific, and sensory stimuli) दी जाती हैं, जिनके प्रति उसके प्रतिक्रिया से उसके अंतर्निहित व्यक्तित्व (Internal Personality) पहलुओं का मूल्यांकन होता है।
प्रक्षेपी  विधि मनुष्य की दमित इच्छाओं पर बाह्य जगत पर आरोपित करने की विधि है। - वारेन (Warren)

साहचर्य प्रविधि (Association Technique), रचना प्रविधि (Construction Technique), पूर्ति प्रविधि (Completion Technique), चयन प्रविधि (Ordering Technique), अभिव्यक्ति परीक्षण (Expression Tests)- रोर्शा स्याही धब्बा परीक्षण (Rorsacharch Ink Blot Test), प्रासंगिक अन्तर्बोध परीक्षण (Thematic Apperception Test), बाल अन्तर्बोध परीक्षण (Children Apperception Test)

नियन्त्रित निरीक्षण विधि (Controlled Observation Method)

यह एक ऐसी अनुसंधान विधि है जिसमें अवलोकनकर्ता विशेष नियमों एवं नियंत्रणों के तहत किसी घटना या व्यवहार का अध्ययन करता है। इसमें अवलोकन की प्रक्रिया पूर्व नियोजित होती है और घटना या प्रतिभागियों पर नियंत्रण रखा जाता है ताकि अध्ययन अधिक विश्वसनीय और वैज्ञानिक हो। इस विधि में किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व का मापन नियन्त्रित परिस्थितियों में उसके बौद्धिक कार्यों, संवेगात्मक विकास, रुचियों, अभिवृत्तियों एवं आदतों आदि का निरीक्षण करके किया जाता है। प्रयोज्य को विभिन्न नियन्त्रित परिस्थितियों में रखकर उसका निरन्तर निरीक्षण किया जाता है और वस्तुनिष्ठ ढंग से किया जाता है और उसके बाद निष्कर्ष निकाले जाते हैं।

इस अवलोकन का उद्देश्य होता है घटना या व्यवहार को नियंत्रित परिस्थितियों में समझना और विश्लेषण करना, जिससे शोधकर्ता को कार्य के कारण और प्रभावों का पता चल सके। इस प्रकार का सही निरीक्षण योग्य एवं प्रशिक्षित व्यक्ति ही कर सकते हैं। यद्यपि यह विधि सामान्य अवलोकन की अपेक्षा तो वस्तुनिष्ठ होती है परन्तु पूर्णरूप से वस्तुनिष्ठ नहीं होती।

श्रेणी मापनी (Rating Scale)

व्यक्तित्व मापन में रेटिंग स्केल एक ऐसी वस्तुनिष्ठ विधि है जिसमें किसी व्यक्ति के विशिष्ट गुणों, व्यवहारों या लक्षणों को पूर्व निर्धारित मानकों (Norms) या बिंदुओं के आधार पर मापा और मूल्यांकन किया जाता है। इस स्केल पर किसी गुण की तीव्रता या मात्रा को अंकित किया जाता है जिससे व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं का मापन सरल और संगठित हो जाता है। इस विधि का प्रयोग सर्वप्रथम मनोभौतिकी में फैक्नर (Fecner) ने किया था परन्तु इस प्रकार की श्रेणी मापनी कर प्रकाशन सर्वप्रथम गाल्टन ने 1889 में किया था।
रेटिंग स्केल में प्रतिभागी या पर्यवेक्षक (Participant or observer) को व्यक्ति के व्यवहार या गुणों के बारे में एक मापदंड या अंक देना होता है, जैसे कि 1 से 5 या 1 से 10 तक की संख्या, जो उस गुण की उपस्थिति या तीव्रता को दर्शाती है। यह स्केल शिक्षकों, परिवार के सदस्यों या स्वयं प्रतिभागी द्वारा भरी जा सकती है। यह तरीका व्यक्तित्व के आँकड़ों को संख्यात्मक रूप में प्रस्तुत करता है जिससे विश्लेषण करना आसान होता है। वर्तमान में कई प्रकार की श्रेणी मापनियों का प्रयोग किया जाता है। इनमें मुख्य हैं - लिकर्ट मापनी (Likert Scale), चैक लिस्ट (Check List), आँकिक मापनी (Numerical Scale), ग्राफिक मापनी (Graphic Scale), क्रमिक मापनी (Ordering Scale), बाध्य चयन मापनी (Forced Choice Scale) आदि। 

शारीरिक परीक्षण (Physiological Tests)


व्यक्तित्व मूल्यांकन की वह विधि है जिसमें व्यक्ति के शारीरिक और जैविक प्रतिक्रियाओं (physiological and biological responses) को मापा जाता है। इस प्रकार के परीक्षणों में मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि, हृदय की धड़कन, रक्तचाप , त्वचा की अंतःस्रावी प्रतिक्रिया और मांसपेशियों की गतिविधि (electrical activity, heart rate, blood pressure, skin endocrine response, and muscle activity) जैसे शारीरिक संकेतों का अध्ययन किया जाता है।

ये परीक्षण इस आधार पर काम करते हैं कि व्यक्तित्व की कुछ विशेषताएं, जैसे भावात्मक प्रतिक्रिया (emotional reactivity), तनाव स्तर (stress level) और मानसिक स्थिति (mental state), व्यक्ति के शारीरिक प्रतिक्रियाओं में परिलक्षित होती हैं। फिजियोलॉजिकल टेस्ट में EEG (electroencephalograph), ECG (electrocardiograph), प्लेथिस्मोग्राफ (plethysmograph), और मांसपेशियों की गतिविधि मापने वाले उपकरणों का उपयोग किया जाता है।

यह विधि अधिक वस्तुनिष्ठ और तकनीकी है, और व्यक्तित्व के जैविक आधारों को समझने में सहायक होती है। हालांकि, इसके लिए विशेष उपकरणों और तकनीकी माहिरता की आवश्यकता होती है, इसलिए यह आम तौर पर प्रयोगशाला और शोध केंद्रों में उपयोग की जाती है।

साहचर्य प्रविधि (Association Technique)


साहचर्य प्रविधि (Association Technique) एक मनोवैज्ञानिक और रिसर्च पद्धति  है जिसका इस्तेमाल अलग-अलग धारणा, विचार एवं अनुभवों के बीच  मानसिक सम्बन्ध का पता करने एवं विश्लेषण करने के लिए के लिए किया जाता है। यह इस सिद्धांत पर आधारित है कि इंसान का दिमाग प्राकृतिक  जुड़ी हुई जानकारी के बीच लिंक या साहचर्य  बनाता है। यह प्रविधि यह समझने में मदद करती है कि कैसे एक सोच या उद्दीपन से दूसरे जुड़े हुए विचार को चालू कर सकता है, जिससे मेमोरी, लर्निंग और सृजनात्मकता  को बढ़ावा मिलता है।


रचना प्रविधि (Construction Technique)

रचना प्रविधि (Construction Technique) व्यक्तित्व मापन की एक विधि है जिसमें व्यक्ति से कुछ नया बनाने, रचना करने या व्यवहार करने को कहा जाता है। इस तकनीक का उद्देश्य व्यक्ति के अंदर छिपे हुए विचारों, भावनाओं, और व्यक्तित्व के पहलुओं को समझना होता है, जिसे वह अपनी रचना में प्रकट करता है। इस तरह की विधि में व्यक्ति की रचनात्मकता तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होती है।
रचना विधि में व्यक्ति को कुछ चित्र बनाना, कहानी रचना करना, चित्रों या वस्तुओं के आधार पर भविष्यवाणी या स्पष्टीकरण देना आदि कार्य दिए जाते हैं। यह प्रक्षेपी विधियों की श्रेणी में आता है क्योंकि इस प्रक्रिया में व्यक्ति अपने अचेतन मन की सामग्री को खुलकर प्रकट करता है। यह विधि विशेष रूप से उन मामलों में उपयोगी होती है जहां व्यक्तित्व का गहरा और अस्पष्ट पक्ष जानना हो जैसे कि मानसिक संघर्ष, अंतर्निहित इच्छाएं और भावनात्मक स्थिति (Mental conflicts, underlying desires and emotional states) । रचना प्रविधि में प्राप्त प्रतिक्रियाओं का मूल्यांकन मूड, भावनात्मक तनाव तथा व्यक्तिगत संघर्ष (Understand Mood, Emotional tension and Personal conflict) को समझने के लिए किया जाता है।

पूर्ति प्रविधि (Completion Technique)

इसमें व्यक्ति को अधूरे वाक्य, कथन या प्रश्न पूरे करने के लिए कहा जाता है। इस तकनीक का उद्देश्य व्यक्ति के अचेतन विचारों, भावनाओं, मानसिक संघर्षों (Unconscious thoughts, feelings, mental conflicts) और व्यक्तित्व के अन्य पहलुओं को उजागर करना है जो वह स्वयं स्पष्ट रूप से व्यक्त नहीं करता।

पूर्ति प्रविधि प्रक्षेपी विधियों की श्रेणी में आती है क्योंकि यह व्यक्ति को स्वाभाविक और स्वतःस्फूर्त प्रतिक्रियाएँ देने के लिए प्रोत्साहित करती है। उदाहरण के लिए, अधूरे वाक्यों को पूरा करने का टेस्ट (Sentence Completion Test) इसमें प्रमुख है, जहां व्यक्ति को कुछ अधूरे वाक्यों को अपनी सोच और भावनाओं के अनुसार पूरा करना होता है। इससे मनोवैज्ञानिक व्यक्ति के आंतरिक मन की गहराईयों तक पहुँचकर उसकी सचेत और अचेतन स्थितियों (conscious and unconscious states) का विश्लेषण कर सकता है।

क्रमिक प्रविधि (Ordering Technique)


इसमें व्यक्ति को विभिन्न विकल्पों, वस्तुओं या कथनों (options, items, or statements) को एक निश्चित क्रम या प्राथमिकता के अनुसार व्यवस्थित करने के लिए कहा जाता है। इस तकनीक में व्यक्ति को यह क्रम अपनी पसंद, महत्वता, या किसी विशेष मापदंड के आधार पर तय करना होता है, जिससे उसके मूल्यांकन, प्राथमिकताएँ, और व्यक्तित्व के पहलुओं का पता चलता है।

सबसे प्रसिद्ध क्रमिक प्रविधि में से एक है Q-sort Technique, जिसमें प्रतिभागी को विभिन्न व्यक्तित्व विशेषताओं या प्रश्नों को उनके चरित्रानुसार क्रम में लगाने के लिए कहा जाता है। इस विधि से व्यक्ति के व्यवहार, मानसिक रुझान, और सामाजिक अभिरुचि के बारे में विस्तृत और संरचित डाटा प्राप्त होता है। Q-sort विधि में वस्तुएं या कथन कार्डों के रूप में होते हैं, जिन्हें व्यक्ति अधिक से कम उपयुक्तता या महत्व के आधार पर क्रमबद्ध करता है।

क्रमिक प्रविधि का उपयोग मुख्यतः मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन, शोध और व्यक्तित्व का गहन विश्लेषण करने के लिए किया जाता है। यह विधि व्यक्ति के गहरे संदर्भों, प्राथमिकताओं, और सोचने के तरीके को उजागर करने में सहायक होती है, जिससे व्यक्तित्व का समग्र और व्यापक चित्र तैयार होता है।

अभिव्यक्ति परीक्षण (Expression test)


व्यक्तित्व मापन की वे तकनीकें हैं जिनमें व्यक्ति से उसकी भावनाओं, विचारों और मनोवैज्ञानिक अवस्थाओं (Feelings, thoughts and psychological states) को किसी प्रकार की अभिव्यक्ति के रूप में प्रदर्शित करने को कहा जाता है। यह अभिव्यक्ति कला, भाषा, व्यवहार, या अन्य प्रतीकों (Art, language, behavior or other symbols) के माध्यम से हो सकती है, जिससे मनोवैज्ञानिक व्यक्ति के आंतरिक मानसिक और भावनात्मक पहलुओं का मूल्यांकन करता है।

अभिव्यक्ति परीक्षणों का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति के मन के गहरे भावों, तनावों, उथल-पुथल, या आराम की स्थिति (Deepest feelings, stresses, turmoil, or states of relaxation) को समझना होता है, जो स्वतः ही बाहर प्रकट होते हैं। ये परीक्षण प्रायः स्वाभाविक और मुक्त अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करते हैं ताकि व्यक्ति बिना किसी बाधा के अपने अंदर के अनुभवों को प्रकट कर सके।

इस प्रकार की तकनीकों में चित्रकारी, मूर्तिकला, नाट्य, अभिनय, गीत-संगीत, और भाषण (Painting, sculpture, drama, acting, music and speech) इत्यादि शामिल हो सकते हैं, जो व्यक्तित्व के भावात्मक और रचनात्मक पक्ष को समझने में मदद करते हैं। अभिव्यक्ति परीक्षण मनोरोग, शिक्षा, कला चिकित्सा, और व्यक्तित्व विकास में व्यापक रूप से इस्तेमाल होते हैं। इसमें प्रमुख विधियाँ हैं -T.A.T. (Thematic Apperception Test), Rorschach Inkblot Test, Bellack Children Apperception Test आदि। 


प्रासंगिक अन्तर्बोध  परीक्षण (Thematic Apperception Test (T.A.T.))


Thematic Apperception Test (T.A.T.) (प्रासंगिक अन्तर्बोध  परीक्षण) एक प्रक्षेपी मनोवैज्ञानिक परीक्षण है, जिसे 1938  में हेनरी ए. मरे और क्रिस्टियाना डी. मॉर्गन ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में विकसित किया था। इस परीक्षण में व्यक्तियों को अस्पष्ट सामाजिक परिस्थितियों और चित्रों की श्रृंखला दिखाई जाती है, जिनके आधार पर उनसे कहानी बनाने के लिए कहा जाता है। उनका कथानक (narrative) उनके अंतर्निहित प्रेरणाओं, भावनाओं और सामाजिक संसार को देखने के नजरिए को प्रकट करता है। यह परीक्षण मनुष्य की आवश्यकताओं के गुण का मापन करता है। 
मरे के मूल परीक्षण में 30 कार्ड थे जिनमें 10 कार्ड केवल पुरुषों के लिए 10 केवल महिलाओं के लिए और 10 कार्ड महिला-पुरुष दोनों के लिए थे। इन कार्डों पर मनुष्य के व्यवहारिक जीवन की घटनाओं से सम्बन्धित चित्र बने हैं। ये चित्र विदेशी परिवेश के हैं। डॉ० उमा चौधरी ने इनके आधार पर भारतीय परिवेश के देगा 13 चित्रों का निर्माण किया है जो 21.5 सेमी * 27.5 सेमी आकार के 13 कार्डों पर अलग-अलग अंकित है। यह परीक्षण मनुष्य की आवश्यकताओं के गुण का मापन करता है। 

इस परीक्षण में  प्रयोज्य को एक-एक करके कुछ तस्वीरें दिखाई जाती हैं  हर तस्वीर में पूरी कहानी बताना होता है कि क्या हो रहा है। इसमें प्रयोज्य को अपनी कहानी में ये हिस्से शामिल करने होते हैं , तस्वीर में दिखाई गई घटना किस वजह से हुई? इस समय क्या हो रहा है? किरदार क्या सोच और महसूस कर रहे हैं? और कहानी कैसे खत्म होती है?

                        




उद्देश्य (Objectives):-

T.A.T. का उद्देश्य व्यक्ति के अचेतन मन की गहरी पहलुओं को उजागर करना है, जिन्हें व्यक्ति सीधे व्यक्त नहीं कर पाता।  के उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  • व्यक्ति के छिपे हुए इच्छाओं, सामाजिक संघर्षों और मनोवैज्ञानिक जटिलताओं को उजागर करना। (To uncover a person's hidden conclusions, social conflicts, and psychological inferences.)
  • व्यक्ति के अचेतन मन के भीतर के विचारों, भावनाओं और प्रेरणाओं की गहराई को समझना। (To uncover the depth of a person's unconscious thoughts, feelings, and motivations.)
  • व्यक्ति के भावनात्मक नियंत्रण, मनोवैज्ञानिक संघर्षों और सामाजिक संबंधों के पहलुओं का मूल्यांकन करना। (To evaluate a person's emotional control, psychological conflicts, and social relationship findings.)
  • व्यक्ति के विचार पैटर्न और आंतरिक मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाओं में अंतर्दृष्टि प्रदान करना। (To provide insight into a person's thought patterns and internal psychological reactions.)
  • मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेप, व्यक्तित्व विकास और थेरैपी योजना के लिए आवश्यक जानकारी प्रदान करना। (To provide information necessary for psychological intervention, personality development, and therapy planning.)
T.A.T. का प्रयोग सामान्य मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन, मनोरोग निदान, अपराधी व्यवहार का परीक्षण, उच्च तनाव वाले पदों (General psychological assessment, psychiatric diagnosis, criminal behavior testing, high-stress positions) हेतु उम्मीदवारों के मूल्यांकन में किया जाता है। यह परीक्षण व्यक्तित्व के अचेतन पहलुओं को जानने और भावनात्मक संघर्षों को समझने के लिए व्यापक रूप से उपयोगी माना जाता है।

रोर्शा स्याही धब्बा परीक्षण (Rorsacharch Ink Blot Test)

रोर्शा स्याही धब्बा परीक्षण एक प्रसिद्ध प्रक्षेपी (Projective) व्यक्तित्व परीक्षण है, जिसमें व्यक्ति को 10 स्याही के धब्बों वाले कार्ड दिखाये जाते हैं और उसकी प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण किया जाता है। रोर्शा  के अनुसार मनुष्य का व्यवहार उसके चेतन (Conscious) से अधिक उसके अचेतन (Unconscious) पर निर्भर करता है। इनकी मान्यता थी कि मनुष्य का कोई भी वह कार्य जो उसके अचेतन से संचालित होता है उसके व्यक्तित्व की सहज अभिव्यक्ति (Expression) करता है और उसके व्यक्तित्व के वास्तविक (Traits) का घोतक (Declarant) होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मनुष्य की इस प्रकार की अभिव्यक्ति (Expression) उसके सामने कोई अपरंपरागत उद्दीपक (unconventional stimuli) प्रस्तुत करके देखी-समझी जा सकती है। उनके अनुसार अपरंपरागत उद्दीपक (unconventional stimuli) के प्रति अनुक्रिया (Response) में मनुष्य का अचेतन अधिक क्रियाशील होता है. इस परीक्षण के द्वारा मापे जाने वाला गुण व्यक्तित्व के वास्तविक लक्षण हैं। इस परीक्षण का आविष्कार 1921 में स्विस मनोचिकित्सक हरमन रोर्शा (Hermann Rorschach) ने किया था। इसका प्रयोग मुख्यतः व्यक्ति के व्यक्तित्व, भावनाओं, सोचने के तरीकों और अचेतन मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाओं का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है।

इस परीक्षण में परीक्षार्थी को क्रमवार 10 अनियमित स्याही धब्बों (ink spots) वाले कार्ड दिखाए जाते हैं जिनमे से 5 काले-सफेद, 2 काले-लाल, 3 बहुरंगी धब्बे वाले कार्ड होते हैं।  प्रत्येक कार्ड देखने के बाद पूछा जाता है: "आपको इसमें क्या दिखाई देता है?" या "यह किस आकृति के समान है?".​​ उत्तर देने के तरीके, समय, और व्यवहार भी नोट किये जाते हैं—प्रतिक्रिया का विश्लेषण चार श्रेणियों स्थान (Location), निर्धारक (Determinants), सामग्री (Content), लोकप्रियता (Popularity) में होता है। 





महत्त्व (Importance):

रोर्शा परीक्षण में रंगीन और काले-सफेद कार्डों का महत्व निम्न प्रकार है:

  • काले-सफेद कार्ड (5 कार्ड) मुख्यतः व्यक्ति के बौद्धिक और गैर-बौद्धिक मानसिक प्रक्रियाओं का संतुलित और तटस्थ आकलन करते हैं। ये कार्ड व्यक्ति के सोचने, ध्यान देने, और अवसाद (thinking, attention, and depression) जैसे मनोवैज्ञानिक तत्वों की जांच में उपयोगी होते हैं।
  • काले और लाल रंग वाले कार्ड (2 कार्ड) व्यक्ति की भावनात्मक प्रतिक्रियाओं, आक्रामकता और उत्तेजना (emotional reactions, aggression and excitability) के निरूपण में मदद करते हैं। ये कार्ड रंग की प्रतिक्रिया से भावनाओं की तीव्रता और प्रकार समझने में सहायक होते हैं।
  • बहुरंगी कार्ड (3 कार्ड) व्यक्ति की सामाजिक प्रतिक्रियाओं, कल्पनाशीलता और संवेगों के समग्र प्रभाव को दर्शाते हैं। इनमें विभिन्न रंगों की स्याहियाँ होती हैं जो व्यक्ति के मनोवैज्ञानिक और संवेदी अनुभवों का विस्तृत आकलन प्रदान करती हैं।








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