Monday, September 22, 2025

राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (National Council for Teacher Education, NCTE)

राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद 
(National Council for Teacher Education, NCTE)

  राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) भारत सरकार का एक सांविधिक निकाय है। राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद, 1973 से अपनी पूर्व स्थिति में, केंद्र और राज्य सरकारों के लिए शिक्षक शिक्षा से संबंधित सभी मामलों पर एक सलाहकार निकाय थी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NPE) 1986 और उसके अंतर्गत कार्ययोजना में शिक्षक शिक्षा प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन हेतु एक प्रारंभिक कदम के रूप में एक वैधानिक दर्जा और आवश्यक संसाधनों से युक्त राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद की परिकल्पना की गई थी। राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद अधिनियम, 1993 (1993 का संख्या 73) के अनुसरण में 17 अगस्त, 1995 को अस्तित्व में आया। यह परिषद केंद्र और राज्य सरकारों के लिए शिक्षक शिक्षा से संबंधित सभी मामलों में कार्य करती है। इसका उद्देश्य पूरे देश में शिक्षक शिक्षा का नियोजित और समन्वित विकास करना और शिक्षक शिक्षा के मानदंडों एवं मानकों के नियमन एवं उचित रखरखाव का प्रबंधन करना है। यह संगठन अखिल भारतीय स्तर पर कार्यरत है और इसमें विभिन्न प्रभागों के साथ-साथ 4 क्षेत्रीय समितियाँ शामिल हैं। उत्तरी क्षेत्रीय समिति, पूर्वी क्षेत्रीय समिति, दक्षिणी क्षेत्रीय समिति और पश्चिमी क्षेत्रीय समिति, जो सभी नई दिल्ली में स्थित हैं। एन0सी0टी0ई0 द्वारा निष्पादित कार्यों का दायरा बहुत व्यापक है, जिसमें सभी शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम शामिल हैं, जैसे- प्रारंभिक शिक्षा में डिप्लोमा (D. El. Ed.), शिक्षा स्नातक (B.Ed.), शिक्षा स्नातकोत्तर (M.Ed.) आदि। इसमें छात्र-शिक्षकों का अनुसंधान और प्रशिक्षण शामिल है।

NCTE को एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका सौंपी गई है और इसने एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम (ITEP), शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय व्यावसायिक मानक (NPST) और राष्ट्रीय मार्गदर्शन मिशन (NMM) जैसे विभिन्न राष्ट्रीय अधिदेशों को अपने हाथ में लिया है। NCTE द्वारा अन्य शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों, जैसे विनियमन, पाठ्यक्रम और डिजिटल संरचना, का संशोधन भी NEP 2020 के अनुरूप किया जा रहा है। ऐसी पहलों के साथ, NCTE न केवल शिक्षकों के व्यावसायिक विकास के लिए प्रयासरत है, बल्कि हमारे देश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षक शिक्षा के लक्ष्य को प्राप्त करने का भी लक्ष्य रखता है। NEP 2020 शिक्षकों की भूमिका में एक व्यापक बदलाव की परिकल्पना करता है, जिसमें सेवा-पूर्व शिक्षक शिक्षा और सेवाकालीन शिक्षक क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया गया है। NCTE का मुख्यालय जी-7, सेक्टर-10, द्वारका, मेट्रो स्टेशन के पास, नई दिल्ली-110075 में स्थित है। 

परिषद (Council):

आमतौर पर यह NCTE की परिषद या सामान्य निकाय के रूप में जाना जाता है। इसका गठन भारत सरकार द्वारा NCTE अधिनियम की धारा 3 के तहत किया जाता है। यह एन0सी0टी0ई0 का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है। यह नीतियाँ निर्धारित करता है, नियम बनाता है और एन0सी0टी0ई0 अधिनियम के तहत उसे दिए गए अधिदेश (Mandate) के विभिन्न पहलुओं पर अंतिम निर्णय लेता है।

कार्यकारी समिति (Executive Council) -

NCTE अधिनियम की धारा 19 (1) के अनुसार, परिषद द्वारा सौंपे गए या विनियमों द्वारा निर्धारित कार्यों के निर्वहन हेतु कार्यकारी समिति के गठन का प्रावधान है। एन0सी0टी0ई0 की आम सभा ने 3 नवंबर, 1995 को आयोजित अपनी पहली बैठक में निर्णय लिया कि कार्यकारी समिति सामान्यतः परिषद के कार्यों का संचालन करेगी और परिषद के सभी मामलों और निधियों के प्रबंधन पर नियंत्रण रखेगी। इसके अतिरिक्त, यह भी निर्णय लिया गया कि कार्यकारी समिति को विनियमों के निर्माण को छोड़कर परिषद की सभी शक्तियों का प्रयोग करने का अधिकार होगा।

क्षेत्रीय समितियां (Regional Committees)

NCTE अधिनियम की धारा 20(1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राष्ट्रीय षिक्षक शिक्षा परिषद ने जयपुर, बेंगलुरु, भुवनेश्वर और भोपाल में चार क्षेत्रीय समितियों की स्थापना की थी, जो क्रमशः देश के उत्तरी, दक्षिणी, पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्रों के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र को सम्मिलित करती हैं। क्षेत्रीय समिति 06.01.1996 को अस्तित्व में आई। क्षेत्रीय समिति की स्थापना NCTE अधिनियम की धारा 14 (शिक्षक शिक्षा में पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण प्रदान करने वाले संस्थानों को मान्यता), धारा 15 (मान्यता प्राप्त संस्थान द्वारा नए पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण की अनुमति), धारा 17 (अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन और उसके परिणाम) और परिषद द्वारा सौंपे गए या विनियमों द्वारा निर्धारित अन्य कार्यों के तहत निर्धारित कार्यों को पूरा करने के लिए की गई थी। 

उद्देश्य (Objectives):

  • भारत भर में शिक्षक शिक्षा प्रणाली का नियोजित और समन्वित विकास- यह सुनिश्चित करना कि शिक्षक प्रशिक्षण व्यवस्थित, एकरूप हो और देश की आवश्यकताओं को पूरा करे।
  • शिक्षक शिक्षा में मानदंडों और मानकों का विनियमन और उचित रखरखाव-  जिसमें संस्थानों की मान्यता, शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता का निर्धारण, और शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों की मान्यता या अस्वीकृति शामिल है।
  • अनुसंधान और प्रशिक्षण- सभी शैक्षिक स्तरों के पूर्व-प्राथमिक, प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक के साथ-साथ अनौपचारिक, वयस्क, अंशकालिक और दूरस्थ शिक्षा में शिक्षकों के लिए अनुसंधान और प्रशिक्षण का समर्थन और संवर्धन करना।
  • शिक्षक शिक्षा में निरंतर सुधार और नवाचार- जिसमें पाठ्यक्रम विकास, शैक्षणिक प्रगति और शिक्षकों का व्यावसायिक विकास शामिल है।
  • समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देना- यह सुनिश्चित करके कि शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम विविध शिक्षार्थियों की जरूरतों को पूरा करते हैं, जिनमें हाशिए पर रहने वाले पृष्ठभूमि और विकलांग लोग शामिल हैं।सरकारी निकायों को सलाह देना- केंद्र और राज्य सरकारों को शिक्षक शिक्षा से संबंधित नीतियों और सुधारों पर सिफारिशें प्रदान करना।
  • कठोर मानकों और दिशानिर्देशों को निर्धारित करके शिक्षक शिक्षा में गुणवत्ता और निरंतरता सुनिश्चित करना, जिससे सुयोग्य और सक्षम शिक्षक तैयार हो सके।
  • व्यावसायीकरण को रोकना व  भारत में शिक्षक शिक्षा की अखंडता और सुलभता बनाए रखना।
  • पूरे देश में शिक्षक शिक्षा प्रणाली का नियोजित और समन्वित विकास करना।
  • शिक्षक शिक्षा प्रणाली में मानदंडों और मानकों का विनियमन और उचित रखरखाव तथा उससे संबंधित मामलों का समाधान करना। 
  • विद्यालयों में पूर्व-प्राथमिक, प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर पर शिक्षण के लिए व्यक्तियों को सक्षम बनाने हेतु अनुसंधान और प्रशिक्षण, अनौपचारिक शिक्षा, अंशकालिक शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा और दूरस्थ (पत्राचार) शिक्षा पाठ्यक्रम शामिल हैं।

कार्य  (Functions): 

शिक्षक शिक्षा के नियोजित एवं समन्वित विकास को सुनिश्चित करने तथा शिक्षक शिक्षा के मानकों के निर्धारण एवं अनुरक्षण हेतु परिषद् का यह कर्तव्य है कि वह ऐसे सभी कदम उठाए जो वह उचित हों। इस अधिनियम के अधीन अपने कार्यों के निष्पादन के प्रयोजनार्थ, परिषद् निम्नलिखित कार्य करती है -

  • इसका कार्य शिक्षक शिक्षा के विभिन्न पहलुओं से संबंधित सर्वेक्षण व अध्ययन करना तथा उनके परिणामों को प्रकाशित करना है।
  • शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में उपयुक्त योजनाओं एवं कार्यक्रमों की तैयारी के संबंध में केंद्र एवं राज्य सरकारों, विश्वविद्यालयों, यू0जी0सी0 एवं मान्यता प्राप्त संस्थानों को सिफारिशें करना।
  • देश में शिक्षक शिक्षा कार्यक्रमों एवं उसके विकास का समन्वय एवं निगरानी करना है।
  • मान्यता प्राप्त संस्थानों में शिक्षक के रूप में नियोजित होने वाले व्यक्ति के लिए न्यूनतम योग्यताओं के संबंध में दिशानिर्देश निर्धारित करना है।
  • शिक्षक शिक्षा में पाठ्यक्रमों या प्रशिक्षणों की किसी निर्दिष्ट श्रेणी के लिए मानदंड निर्धारित करना, जिसमें प्रवेश के लिए न्यूनतम पात्रता मानदंड, उम्मीदवारों के चयन की विधि, पाठ्यक्रम की अवधि, पाठ्यक्रम की विषयवस्तु और पाठ्यक्रम का तरीका शामिल है।
  • मान्यता प्राप्त संस्थानों द्वारा अनुपालन हेतु, नए पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण शुरू करने हेतु तथा भौतिक एवं शिक्षण सुविधाएं, स्टाफिंग पैटर्न और स्टाफ योग्यता प्रदान करने हेतु दिशानिर्देश निर्धारित करना है।
  • शिक्षक शिक्षा योग्यता प्राप्त करने के लिये ऐसी परीक्षाओं में प्रवेश के मानदंडों और पाठ्यक्रमों या प्रशिक्षण योजनाओं के संबंध में मानक निर्धारित करना है।
  • मान्यता प्राप्त संस्थानों द्वारा ली जाने वाली शिक्षण शुल्क और अन्य शुल्कों के संबंध में दिशानिर्देश निर्धारित करना है।
  • शिक्षक शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देना एवं संचालित करना तथा उसके परिणामों का प्रसार करना।
  • परिषद का कार्य निर्धारित मानदंडों, दिशानिर्देशों और मानकों के कार्यान्वयन की समय-समय पर जांच और समीक्षा करना और मान्यता प्राप्त संस्थान को उचित रूप से सलाह देना है।
  • मान्यता प्राप्त संस्थानों पर जवाबदेही लागू करने के लिए उपयुक्त प्रदर्शन मूल्यांकन प्रणाली, मानदंड और तंत्र विकसित करना।
  • शिक्षक शिक्षा के विभिन्न स्तरों के लिए योजनाएँ तैयार करना और मान्यता प्राप्त संस्थानों की पहचान करना तथा शिक्षक विकास कार्यक्रमों के लिए नए संस्थान स्थापित करना।

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