Monday, September 22, 2025

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grant Commission, UGC)


विश्वविद्यालय अनुदान आयोग 
(University Grant Commission, UGC)

भारत में राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली तैयार करने का पहला प्रयास 1944 में भारत में युद्धोत्तर शैक्षिक विकास पर केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की रिपोर्ट के साथ हुआ, जिसे सार्जेंट रिपोर्ट के नाम से भी जाना जाता है। इसने एक विश्वविद्यालय अनुदान समिति के गठन की सिफारिश की, जिसका गठन 1945 में अलीगढ़, बनारस और दिल्ली के तीन केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कार्यों की देखरेख के लिए किया गया। 1947 में, समिति को तत्कालीन सभी मौजूदा विश्वविद्यालयों से निपटने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई।

स्वतंत्रता के तुरंत बाद, 1948 में डॉ. एस. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य "भारतीय विश्वविद्यालय शिक्षा पर रिपोर्ट तैयार करना और देश की वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं के अनुरूप वांछनीय सुधार और विस्तार का सुझाव देना" था। इसने सिफारिश की कि विश्वविद्यालय अनुदान समिति का पुनर्गठन यूनाइटेड किंगडम के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सामान्य मॉडल पर किया जाए, जिसमें एक पूर्णकालिक अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति प्रतिष्ठित शिक्षाविदों में से की जाए।

1952 में, केंद्र सरकार ने निर्णय लिया कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों और अन्य विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षा संस्थानों को सार्वजनिक निधि से अनुदान आवंटन से संबंधित सभी मामले विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को भेजे जा सकते हैं। परिणामस्वरूप, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) का औपचारिक उद्घाटन तत्कालीन शिक्षा, प्राकृतिक संसाधन और वैज्ञानिक अनुसंधान मंत्री स्वर्गीय श्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने किया।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की स्थापना उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विभिन्न राज्य तथा केन्द्रीय विश्वविद्यालयों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए की गयी। इस संस्था का महत्त्व न केवल अध्यापक शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत उच्च शिक्षा केन्द्रों के लिए है बल्कि सम्पूर्ण उच्च शिक्षा एवं अध्ययन केंद्रों के लिए है। 28 दिसम्बर 1953 को इस संस्था की स्थापना की गयी थी।  विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) भारत सरकार, शिक्षा मंत्रालय, उच्च शिक्षा विभाग का एक सांविधिक निकाय है, जिसका गठन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 (1956 का 3) के तहत किया गया है, जिसके दो उत्तरदायित्व  उच्च शिक्षा संस्थानों को धन उपलब्ध कराना और समन्वय, निर्धारण और मानकों का रखरखाव करना हैं। 


यू. जी. सी. के कार्य एवं उद्देश्य (Function & Objectives of U.G.C.)



विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) भारत में एक वैधानिक निकाय है जो विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में उच्च शिक्षा के मानकों के विनियमन, समन्वय और रखरखाव के लिए उत्तरदायी है।
  • वित्त पोषण और वित्तीय सहायता (Funding and Financial Assistance):  यूजीसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को शैक्षणिक, अनुसंधान और बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए अनुदान आवंटित और वितरित करता है।
  • विश्वविद्यालयों की मान्यता (Recognition of Universities):  यह नए संस्थानों को औपचारिक मान्यता प्रदान करता है और गुणवत्ता आश्वासन के लिए निर्धारित मानदंडों का पालन सुनिश्चित करता है।
  • शैक्षणिक मानक निर्धारित करना (Setting Academic Standards):  यूजीसी विश्वविद्यालयों में स्नातक, स्नातकोत्तर और अनुसंधान कार्यक्रमों के लिए शैक्षिक मानकों का निर्धारण, रखरखाव और निगरानी करता है।
  • गुणवत्ता आश्वासन और प्रत्यायन (Quality Assurance and Accreditation): यह न्यूनतम मानकों पर नियम बनाता है, प्रत्यायन की निगरानी करता है, और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर संस्थानों की समीक्षा करता है।
  • अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा (Promotion of Research and Innovation):  यूजीसी अनुसंधान परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है, संकाय और छात्र अनुसंधान को प्रोत्साहित करता है, और अनुसंधान केंद्रों की स्थापना का समर्थन करता है।
  • संकाय और पाठ्यक्रम विकास (Faculty and Curriculum Development):  आयोग शिक्षण प्रासंगिकता और उत्कृष्टता सुनिश्चित करने के लिए पाठ्यक्रम विकास, संशोधन और संकाय सुधार में सहायता करता है।
  • छात्रवृत्ति और फैलोशिप (Scholarships and Fellowships): यूजीसी उच्च अध्ययन को बढ़ावा देने और योग्य एवं आर्थिक रूप से कमज़ोर छात्रों की सहायता के लिए विभिन्न छात्रवृत्ति और फैलोशिप प्रदान करता है।
  • सलाहकार की भूमिका (Advisory Role):  यूजीसी केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ संस्थानों को उच्च शिक्षा की प्रगति के लिए आवश्यक नीतियों और उपायों पर सलाह देता है।
  • नियामक निरीक्षण (Regulatory Oversight):  यह एक नियामक प्राधिकरण के रूप में कार्य करता है और कदाचार या घटिया शिक्षा के मामलों में हस्तक्षेप करने की शक्ति रखता है।

  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग (International Collaboration): यूजीसी वैश्विक शैक्षणिक संबंधों को मज़बूत करने के लिए छात्र आदान-प्रदान, संयुक्त शोध परियोजनाओं और शैक्षणिक नेटवर्किंग सहित भारतीय और विदेशी विश्वविद्यालयों के बीच सहयोगात्मक उपक्रमों और साझेदारियों को बढ़ावा देता है।
  • समावेशिता को बढ़ावा (Promotion of Inclusivity): यह हाशिए पर पड़े और वंचित समुदायों की शिक्षा के लिए पहलों का समर्थन करता है, आरक्षण नीतियों को लागू करता है और सभी समूहों के लिए उच्च शिक्षा तक समान पहुँच के लिए कार्य करता है।
  • मूल्यांकन और निगरानी (Evaluation and Monitoring): यूजीसी विश्वविद्यालय और महाविद्यालय शिक्षा में प्रगति का निरंतर मूल्यांकन करता है और मानकों को पूरा करने के लिए संस्थागत निरीक्षण और लेखा परीक्षा आयोजित करता है।
  • प्रमुख परीक्षाओं का आयोजन (Organizing Major Examinations): यह संकाय योग्यता का आकलन करने और उच्च शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण नियुक्तियों को सुगम बनाने के लिए UGC NET, CSIR NET और ICAR NET जैसी राष्ट्रीय स्तर की पात्रता और प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन करता है।
  • सलाहकार और संपर्क कार्य (Advisory and Link Functions): यूजीसी केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करता है, जो उच्च शिक्षा में नीति, सुधार उपायों और सुधारों पर विशेषज्ञ सलाह प्रदान करता है।
  • फर्जी विश्वविद्यालयों का विनियमन (Regulation of Fake Universities): यह इस क्षेत्र में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए फर्जी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की नियमित रूप से अद्यतन सूचियों की निगरानी और प्रकाशन करता है।
  • संकाय और छात्र संबंध (Faculty and Student Bonding): यूजीसी उच्च शिक्षा में सामुदायिक और सांस्कृतिक भावना को बढ़ावा देता है, संकाय-छात्र संपर्क को प्रोत्साहित करता है और संस्थागत लोकाचार को बढ़ावा देता है।
  • आवधिक पाठ्यक्रम समीक्षा (Periodic Curriculum Review): यूजीसी पाठ्यक्रम ढाँचों को समकालीन आवश्यकताओं, तकनीकी प्रगति और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के लिए नियमित रूप से संशोधित करता है।
  • विवाद समाधान (Dispute Resolution) : एक अर्ध-न्यायिक निकाय के रूप में, यूजीसी मान्यता, वित्त पोषण और विश्वविद्यालय प्रबंधन से संबंधित विवादों को संभालता है, जिसमें मानकों को पूरा करने में विफल रहने वाले संस्थानों की मान्यता वापस लेना भी शामिल है।
  • विश्वविद्यालय शिक्षा को बढ़ावा देना और समन्वय करना (Promoting and Coordinating University Education): यूजीसी का लक्ष्य पूरे भारत में विश्वविद्यालय शिक्षा को आगे बढ़ाना है, साथ ही बेहतर गुणवत्ता और पहुंच के लिए संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है।
  • शैक्षणिक मानकों का रखरखाव (Maintenance of Academic Standards): यह विश्वविद्यालयों में शिक्षण, परीक्षा, अनुसंधान और शैक्षणिक प्रथाओं में मानकों को परिभाषित करने और बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है।
  • शैक्षिक विकास की निगरानी (Monitoring Educational Developments): आयोग महाविद्यालयीन और विश्वविद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति पर नज़र रखता है, तथा नियमित रूप से पाठ्यक्रम और शिक्षण विधियों की समीक्षा और अद्यतन करता है।




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