समावेशी शिक्षा में समुदाय की भूमिका (Role of Community in Inclusive Education)
समुदाय का अर्थ – समुदाय को आंग्ल भाषा में कम्युनिटी कहते हैं जो “काम” तथा “म्युनिस” दो शब्दों से मिलकर बनता है।com का अर्थ है – एक साथ तथा “Munis” का अर्थ है “सेवा करना”।इस प्रकार कम्युनिटी अथवा समुदाय का अर्थ व्यक्तिओं के उस पड़ौस से हैं जिसमें वे रहते हैं अथवा समुदाय दो या दो व्यक्तिओं का ऐसा समूह है जो एकता अथवा समदुयिक भावना के जागृत हो जाने से किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में सामान्य जीवन की सामान्य नियमों द्वारा व्यतीत करने के लिए स्वत: ही विकसित हो जाती है।इस प्रकार समुदाय के निर्माण एवं स्थायित्व की दृष्टि से दो या दो से अधिक व्यक्ति, निश्चित भौगोलिक क्षेत्र समुदायिक भावना सामान्य जीवन तथा नियमों आदि तत्वों का होना परम आवश्यक है।समुदाय का क्षेत्र छोटा से छोटा भी हो सकता है और बड़े से बड़ा भी।सामान्यता: समुदाय का क्षेत्र उसके समुदायों की आर्थिक, सांस्कृतिक तथा राजनितिक समानताओं पर निर्भर करता है।अत: एक गाँव, नगर, अथवा राष्ट्र में दो या दो से अधिक जिनते भी व्यक्ति एकता के सूत्र में बढ़कर सामान्य उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सामान्य जीवन व्यतीत करते हो, सभी मिलकर एक समुदाय का निर्माण करते हैं |
समुदाय विद्यालय को अच्छा वातावरण प्रदान करके बालकों के विकास में सहायता कर सकता है जिसमें अक्षम बालकों के पास विद्यालय में जीवन के सभी पहलुओं में सहकर्मियों के साथ भाग लेने और प्राप्त करने के अवसर हैं। एक समावेशी प्रणाली में विशेष शिक्षक, विशिष्ट अनुदेष्णात्मक सहायताकर्मी, सामान्य शिक्षक एवं अन्य शिक्षा कर्मी अक्षम बालकों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मिलकर काम करते हैं। समुदाय संगठन बालक की विकलांगता, विशेष शिक्षा प्रणाली एवं आई0इ0पी0 प्रक्रिया, कानून व अधिकारों से उनके जिम्मदारियों को समझने के लिए परिवारों एवं अभिभावकों की व्यक्तिगत सहायता कर रहा है।
विशिष्ट आवश्यकता वाले बालकों की आवश्यकता के लिए समुदाय निम्न प्रकार की भूमिका निभाते हैं-
1. शारीरिक विकास (Physical Development)-
बच्चे परिवार तथा समुदाय की नकल करके रहन -सहन के तरीके सीखते है। स्वास्थ्य रहने के लिए आदतों का निर्माण परिवार व समुदाय के सदस्यों का अनुकरण करके ही सीखा जाता है। समुदाय के सदस्य जगह-जगह पर व्यायाम शाखायें, अखाड़े, खेल के मैदान और पार्क आदि की व्यवस्था करते हैं। समुदाय विद्यालय का निर्माण करके बच्चों के शारीरिक विकास की व्यवस्था करते हैं। जिससे बच्चों का शारीरिक विकास ठीक ढंग से होती है।
2. मानसिक विकास (Mental Development)-
समुदाय में बच्चे अपनी मूल शक्तियों के लिये पूरा-पूरा अवसर प्राप्त करते हैं, विभिन्न प्रकार के व्यक्तियों से मिलते हैं, विभिन्न परिस्थितियों में से होकर गुजरते हैं, विभिन्न विषयों पर तर्क-वितर्क करते हैं। परिणाम स्वरूप उनका बौद्धिक एवं मानसिक विकास होता है। समुदाय द्वारा आयोजित विभिन्न समारोह, नाटक , सिनेमा आदि की सहायता से भी बच्चों का मानसिक विकास होता है।
3. चारित्रिक एवं नैतिक विकास (Character and Moral Development)-
बालक के चारित्रिक एवं नैतिक विकास में परिवार के बाद समुदाय कही प्रभाव डालता है। जो बच्चे ऐसे समुदाय में रहते हैं जहाँ अनुशासन का आदर किया जाता है तो ऐसे समुदाय के बच्चे अनुशासित होते हैं। उदार विचार वाले समुदाय के बच्चों में उदारता का विकास होता है एवं उग्र विचार वाले समुदाय के बच्चों में उग्रता का विकास होता है। समुदाय का उच्च धार्मिक पर्यावरण सहिष्णुता को जन्म देता है और उससे बच्चों में अनेक चारित्रिक एवं नैतिक गुणों का विकास होता है।
4. सामाजिक विकास (Social Development)-
समुदाय एक ऐसा सामाजिक समूह होता है जिसके सदस्यों के बीच 'हम' की भावना होती है। इसके सदस्य आपस मे मिल जुलकर रहते हैं और अपनी सामान्य आवश्यकताओं की पूर्ति एक-दूसरे के सहयोग से करते हैं। ऐसे समूहों के बीच बच्चों में प्रेम और सहानुभूति की भावना बढ़ती है। उसमें दया, त्याग, क्षमा और परोपकार आदि गुणों का विकास होता है।
5. सांस्कृतिक विकास (Cultural Development)-
बच्चे जिस समुदाय में रहते हैं उसी के तौर तरीके सीखते हैं। रीति रिवाज मूल्यों और मान्यताओं की शिक्षा भी बच्चे समुदाय से ही प्राप्त करते हैं। उन सबके प्रति उनमें एक भावात्मक संगठन होता है और वह उनकी संस्कृति कहलाती है । समुदाय विभिन्न औपचारिक तथा अनौपचारिक शिक्षा संस्थानों का निर्माण कर संस्कृति का सरंक्षण करते है।
6. आध्यात्मिक विकास (Spiritual Development)-
बच्चे के आध्यात्मिक विकास में भी समुदाय का महत्वपूर्ण योगदान है। यदि समुदाय धर्मप्रधान होता है तो बच्चों में धार्मिक भावनाओं का विकास होता है। वे आत्मा व परमात्मा के बारे में सोचते हैं। यदि समुदाय में धर्म का स्थान नही होता तो परिवार में पड़े धार्मिक संस्कार भी धुंधले पड़ने लगते हैं। हमारा देश धर्म प्रधान देश है कोई भी समुदाय धर्म विहीन नही है। हम धार्मिक उदारता के समर्थक हैं । इसकी शिक्षा भी बच्चे समुदाय में रहकर सीखते हैं।
सन्दर्भ ग्रन्थ सूची
- ठाकुर , यतीन्द्र (2019 ), समावेशी शिक्षा , अग्रवाल पब्लिकेशन , आगरा
- https://hi.vikaspedia.in/education/education-best-practices/93693f91594d93793e-914930-93892e94192693e92f
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