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Saturday, April 4, 2026
Monday, March 30, 2026
मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health)
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LokLF; lEiw.kZ O;fäRo dk iw.kZ le:irk ds lkFk dk;Z djuk gSA" ¼Mental health is the full harmonious
functioning of the whole personality.– Headfield½
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ds çfr lek;kstu LFkkfir djus esa lgk;rk nsrh gSA ¼Such
an ability which helps in establishing adjustment to the difficult situations
of life.& Cattell & Maslow½
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ekufld LokLF; ds fu;eksa dh [kkst djuk o laj{k.k djuk gSA** ¼'Mental health means discovering and protecting
the laws of mental health.- James Drever½
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LokLF; dk laca/k lexz ekuo laca/kksa ds fodkl ls gSA' ¼'Mental health is concerned with the
development of holistic human relationships.'- Skinner½
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LokLF; fu;eksa dk lewg gS] tks O;fä dks Lo;a ds lkFk rFkk nwljksa ds jgus ds
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¼'Mental health is a set of rules that
enable a person to live with himself and with others.'- Kolsnik½
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¼'Mental health does not refer to the
absence of mental illness or disorder but to physical, mental and social
well-being.'- WHO½
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¼Aims of Mental
Health½
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¼Characteristics
of Mental Health½
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Saturday, January 31, 2026
Thursday, January 29, 2026
टी-परीक्षण (T-Test)
टी-परीक्षण (T-Test)
दो समूहों के मध्यमानों के अन्तर की सार्थकता ज्ञात करने की कतिपय सांख्यिकीय विधियाँ हैं। सबका उपयोग अलग-अलग स्थितयों में किया जाता है। प्रायः न्यादर्श (Sample) के वृहत् (N ≥30) होने पर क्रांतिक अनुपात (Critical Ratio) द्वारा दो मध्यमानों के अन्तर की सार्थकता की परख की जाती है जबकि लघु न्यादर्श (N <30) में इसके लिए 'टी' (t) परीक्षण की गणना की जाती है। मध्यमान भी सहसम्बन्धित (Correlated) या असहसम्बन्धित (Uncorrelated) हो सकते हैं जिसके फलस्वरूप गणना विधि में अन्तर पाया जाता है।
दो समूह मध्यमानों (Sample Means) के अन्तर की सार्थकता के लिए प्रायः जेड परीक्षण (Z-Test) अथवा टी-अनुपात परीक्षण (t-Ratio Test) का प्रयोग किया जाता है। जेड-परीक्षण (Z-test) को क्रांतिक अनुपात परीक्षण (Critical Ratio Test) भी कहते हैं। जेड-परीक्षण तथा टी-परीक्षण उन्नतः एक जैसे ही होते हैं परन्तु बड़े प्रतिदर्शों के लिए प्रायः जेड-परीक्षण तथा छोटे न्यादर्शों के लिए टी-परीक्षण शब्द युग्मों का प्रयोग किया जाता है। परीक्षणों के नाम में यह अन्तर दो समूहों मध्यमानों के न्यादर्श वितरण (Sampling Distribution) की प्रकृति के कारण हैं।
दो छोटे समूहों के मध्यमानों के अन्तर का न्यादर्श वितरण (Sampling Distribution) टी वितरण के अनुरूप होता है। यही कारण है कि दो बड़े प्रतिदर्शों के मध्यमानों के अन्तर के परीक्षण को जेड-परीक्षण (Z-Test) कहा जाता है जबकि दो छोटे प्रतिदर्शों से प्राप्त मध्यमानों के अन्तर के परीक्षण को टी-परीक्षण कहा जाता है। परन्तु इन दोनों ही परीक्षणों के लिए गणना सूत्र मूल रूप में समान होते हैं। दो मध्यमानों के अन्तर की सार्थकता के इस वस्तुतः टी-परीक्षण में टी-अनुपात (t-Ratio) की गणना की जाती है। टी-अनुपात वास्तव में दो मध्यमानों के अन्तर तथा इस अन्तर की प्रमाणिक त्रुटि का अनुपात (Ratio) होता है।
सार्थकता के स्तर का निर्धारण (Determination of Level of Signification) -
सार्थकता के स्तर का तात्पर्य विश्वास स्तर से लिया जाता है। सार्थकता के स्तर के आधार पर ही अध्ययनकर्ता अपनी शून्य परिकल्पना (Null-Hypothesis) की जाँच करता है। अध्ययनकर्ता अध्ययन प्रारम्भ करने के पूर्व ही सार्थकता का स्तर निर्धारित कर लेता है। वैज्ञानिक या प्रयोगात्मक अध्ययनों में प्रायः दो सार्थकता स्तरों को प्रयुक्त किया जाता है जो 0.05 सार्थकता स्तर या 0.01 सार्थकता स्तर कहा जाता है। इन दो सार्थकता स्तरों के अतिरिक्त और भी सार्थकता स्तर होते हैं लेकिन इनका प्रयोग वैज्ञानिक या प्रयोगात्मक अध्ययनों में नहीं किया जाता है। वृहत् न्यादर्श में जब CR का मूल्य 1.96 या इससे अधिक होता है तब अध्ययनकर्ता 0.05 सार्थकता स्तर पर शून्य परिकल्पना को अस्वीकृत (Reject) करते हैं। लेकिन जब CR का मान 2.58 या इससे अधिक होता है तब वह अपनी शून्य परिकल्पना को 0.01 सार्थकता स्तर पर अस्वीकृत (Reject) कर देते हैं।
दो समूहों के मध्यमानों के अन्तर की प्रामाणिक त्रुटि की गणना करना (Calculation of standard error of difference between means of two groups)-
दो समूहों के मध्यमानों के अन्तर की प्रामाणिक त्रुटि (SE) की गणना करने के लिए निम्नलिखित दो सूत्र प्रयुक्त किये जाते हैं-
प्रथम सूत्र-
द्वितीय सूत्र -
σ d = दो प्रतिदर्श के मध्यमानों के अन्तर की प्रामाणिक त्रुटि
σ M1 = पहले प्रतिदर्श के मध्यमान की प्रामाणिक त्रुटि
σ M2 = दूसरे प्रतिदर्श के मध्यमान की प्रामाणिक त्रुटि
σ1² = पहले प्रतिदर्श के प्रामाणिक विचलन का वर्ग
σ2 ² = दूसरे प्रतिदर्श के प्रामाणिक विचलन का वर्ग
N1= प्रथम समूह में इकाइयों की संख्या
N2 = दूसरे समूह में इकाइयों की संख्या
क्रान्तिक अनुपात (CR) का मान ज्ञात करना और उसकी व्याख्या करना (Calculation of CR value and its interpretation)- कान्तिम अनुपात (CR), दो समूहों या न्यादर्शों के मध्यमानों के अन्तर तथा मध्यमानों के अन्तर की प्रामाणिक त्रुटि का अनुपात होता है। क्रान्तिक अनुपात की गणना से जो मूल्य प्राप्त होता है उसकी व्याख्या t तालिका के आधार पर की जाती है-
मुख्य मान्यताएँ (Main Assumptions):
- स्वतंत्रता (Independence): समूहों के अंदर और बीच अवलोकन स्वतंत्र होने चाहिए; एक डेटा पॉइंट दूसरे को प्रभावित नहीं करना चाहिए।
- नॉर्मैलिटी (Normality): हर ग्रुप में डेटा लगभग सामान्य वितरण में होना चाहिए, खासकर छोटे सैंपल के लिए (n>30 के लिए मज़बूत)।
- वेरिएंस की एकरूपता (दो-सैंपल t-टेस्ट के लिए) (Homogeneity of Variance): समूहों में वेरिएंस लगभग बराबर होने चाहिए (अनुपात <4:1 या लेवेन टेस्ट से जाँच की जाती है)।
- रैंडम सैंपलिंग (Random Sampling): सैंपल को आबादी से रैंडमली लिया जाना चाहिए ताकि वे उसका सही प्रतिनिधित्व कर सकें।
प्रकार (Types):
- One-Sample T-Test: वन-सैंपल t-टेस्ट यह तय करता है कि क्या किसी एक सैंपल का मध्यमान, जाने-पहचाने या माने गए जनसँख्या मध्यमान से काफी अलग है।
- Two-Sample T-Test: टू-सैंपल टी-टेस्ट दो स्वतंत्र समूह के मध्यमानों की तुलना करता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनमें कोई खास अंतर है या नहीं।
- Paired T-Test: यह दो संबंधित स्थितियों में एक ही समूह के अंदर औसत अंतर का मूल्यांकन करता है, जैसे पहले और बाद के माप।
- पैरामीट्रिक टेस्ट जो सैंपल डेटा पर आधारित होता है जब जनसँख्या वेरिएंस अज्ञात होता है।
- हाइपोथिसिस टेस्टिंग के लिए p-वैल्यू देने के लिए t-स्टैटिस्टिक की गणना करता है (जैसे, H0: कोई अंतर नहीं)।
Friday, January 23, 2026
सांख्यिकीय तकनीक (Statistics Techniques)
सांख्यिकीय तकनीक (Statistics Techniques)
सांख्यिकीय तकनीक में सार्थक नतीजे निकालने के लिए डेटा इकट्ठा करने, विश्लेषण करने, समझने और पेश करने के कई तरीके शामिल हैं। ये शिक्षा, भूगोल और रिसर्च जैसे क्षेत्रों में परिकल्पना टेस्ट करने, रिश्तों को मॉडल करने और पैटर्न को विज़ुअलाइज़ करने के लिए बहुत ज़रूरी हैं।
तकनीकों का वर्गीकरण
सांख्यिकीय तकनीकों को मुख्य रूप से कार्य (वर्णनात्मक बनाम अनुमानित) और मान्यताओं (पैरामीट्रिक बनाम नॉन-पैरामीट्रिक) के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
- वर्णनात्मक सांख्यिकी (Descriptive statistics): डेटा की विशेषताओं को सारांशित करती है (माध्य, माध्यिका, बहुलक, SD, हिस्टोग्राम जैसे ग्राफ़ mean, median, mode, SD, graphs like histograms)। बिना किसी अनुमान के डेटासेट का वर्णन करने के लिए उपयोग किया जाता है।
- अनुमानित सांख्यिकी (Inferential statistics): न्यादर्श से जनसंख्या के बारे में निष्कर्ष निकालती है (परिकल्पना परीक्षण, विश्वास अंतराल)।
- पैरामीट्रिक (Parametric): सामान्य वितरण (Normal Distribution) मानती है (जैसे, t-टेस्ट, ANOVA, प्रतिगमन)। जब मान्यताएँ सही होती हैं तो अधिक शक्तिशाली होती है।
- नॉन-पैरामीट्रिक (Non-parametric): कोई वितरण मान्यताएँ नहीं (जैसे, मान-व्हिटनी U, क्रुस्कल-वालिस, स्पीयरमैन सहसंबंध)। क्रमबद्ध/विषम डेटा के लिए मजबूत।
प्रचालिक परीक्षण (Parametric Test)
प्राचलिक (Parametric) तकनीकें सांख्यिकीय तरीके हैं जो यह मानते हैं कि डेटा एक खास वितरण (Distribution) (आमतौर पर नॉर्मल) वाली आबादी (Population) से आता है और इनका इस्तेमाल आबादी के पैरामीटर जैसे कि मध्यमान (Mean) और सहसम्बन्ध (Corelation) का अनुमान लगाने और उनका परीक्षण (Test) करने के लिए किया जाता है।
वे इन अज्ञात आबादी पैरामीटर (Population Parameters) का अनुमान लगाने और निष्कर्ष निकालने (अनुमान, परिकल्पना परीक्षण, भविष्यवाणी) के लिए न्यादर्श डेटा का उपयोग करते हैं।
बुनियादी विचार / मान्यताएँ (Basic Considerations):
कोई भी प्राचलिक (Parametric) परीक्षण लागू करने से पहले, शोधकर्ताओं को कुछ मुख्य शर्तों की जाँच करनी चाहिए:-
- माप का स्तर (Level of Measurement): आश्रित चर (DV) कम से कम अंतराल या अनुपात (Interval or Ratio) पैमाने पर होना चाहिए (जैसे, परीक्षण स्कोर, ऊँचाई, प्रतिक्रिया समय)।
- वितरण संबंधी धारणा (Distributional assumption): आबादी (या अवशेषों) को एक निर्दिष्ट वितरण (specified distribution) का पालन करना चाहिए, आमतौर पर सामान्य, जो छोटे Sample में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है
- स्वतंत्रता (Independence): अवलोकन स्वतंत्र होने चाहिए; एक प्रतिभागी का स्कोर दूसरे को प्रभावित नहीं करना चाहिए।
- विचरण की एकरूपता (Homogeneity of variance): तुलना किए जा रहे समूहों में लगभग समान विचरण होना चाहिए ।
- न्यादर्श आकार (Sample size): कई पैरामीट्रिक परीक्षण पर्याप्त बड़े Sample के साथ सबसे अच्छा काम करते हैं; बड़े n के साथ, केंद्रीय सीमा प्रमेय परीक्षणों को सामान्यता के उल्लंघन के प्रति अधिक मजबूत बनाता है।
- रैखिकता (सहसम्बन्ध/रिग्रेशन के लिए) (Linearity (for correlation/regression)): पियर्सन कोरिलेशन और लीनियर रिग्रेशन जैसे तरीकों के लिए चर के बीच संबंध लगभग रैखिक होना चाहिए।
प्रमुख पैरामेट्रिक तकनीकें (Main Parametric Techniques):
शिक्षा, मनोविज्ञान और सामाजिक विज्ञान में इस्तेमाल होने वाली सामान्य पैरामेट्रिक तकनीकों में शामिल हैं:
- Z-टेस्ट (Z-test): Z-टेस्ट एक पैरामेट्रिक सांख्यिकीय परीक्षण है जो बड़े नमूनों (आमतौर पर n ≥ 30) में जनसंख्या माध्य की जाँच के लिए उपयोग किया जाता है, जब जनसंख्या का मानक विचलन ज्ञात हो। यह सामान्य वितरण (Normal Distribution) पर आधारित है और t-टेस्ट से भिन्न है क्योंकि यह Z-वितरण का उपयोग करता है।
- t-टेस्ट (t-test):
वन-सैंपल t-टेस्ट: एक सैंपल के माध्य की तुलना ज्ञात या परिकल्पित जनसंख्या (Hypothetical population) के माध्य से करता है।
इंडिपेंडेंट-सैंपल t-टेस्ट: दो स्वतंत्र समूहों के माध्यों की तुलना करता है ।
पेयर्ड-सैंपल t-टेस्ट: दो संबंधित स्कोरों के माध्यों की तुलना करता है (जैसे, एक ही समूह का प्री-टेस्ट vs पोस्ट-टेस्ट)।
- ANOVA (एनालिसिस ऑफ वेरिएंस):
टू-वे ANOVA: दो कारकों और उनके इंटरैक्शन के एक निरंतर परिणाम पर प्रभावों की जांच करता है।
- पियर्सन प्रोडक्ट-मोमेंट कोरिलेशन (r): दो निरंतर चर के बीच रैखिक संबंध की शक्ति और दिशा को मापता है।
- सिंपल और मल्टीपल लीनियर रिग्रेशन: लीनियर, पैरामेट्रिक मान्यताओं के तहत एक या अधिक प्रेडिक्टर्स से एक निरंतर परिणाम को मॉडल और प्रेडिक्ट करता है।
Tuesday, December 9, 2025
शैक्षिक मनोविज्ञान की विधियाँ (Methods of Educational Psychology)
शैक्षिक मनोविज्ञान की विधियाँ (Methods of Educational Psychology)
- अंतःदर्शन विधि (Introspective Method)
- बहिर्निरीक्षण विधि (Extrospection/Observational Method)
- तुलनात्मक विधि (Comparative Method)
- मनो-भौतिकी विधि (Psycho-physical Method)
- मनोविश्लेषण विधि (Psychoanalytic Method)
- चिकित्सीय विधि (Clinical Method)
- प्रायोगिक विधि (Experimental Method)
- केस‑स्टडी विधि (Case Study Method)
- आनुवंशिक या विकासात्मक विधि (Genetic or Developmental Method)
- परीक्षण या मनोवैज्ञानिक मापन विधि (Test or Psychological Measurement Method)
- सांख्यिकीय एवं सर्वेक्षण विधियाँ (Statistical and Survey Methods)
अंतःदर्शन विधि (Introspective Method)
- प्रेक्षक और अनुभवकर्ता (observer and the experiencer) दोनों वही व्यक्ति होता है, यानी जो अनुभव कर रहा है वही निरीक्षण भी कर रहा है।
- यह विधि प्रत्यक्ष (direct), तात्कालिक (immediate) और निजी (personal) मानसिक अनुभवों तक पहुँचने का साधन देती है, जिन्हें बाह्य प्रेक्षण (external observation) से देख पाना सम्भव नहीं होता।
- व्यक्ति अपने विचारों, भावनाओं, कल्पनाओं, संकल्पों (thoughts, feelings, imaginations, resolutions) आदि अत्यन्त सूक्ष्म तथा आन्तरिक मानसिक प्रक्रियाओं को सीधे अनुभव और व्यक्त कर सकता है, जिन्हें बाह्य प्रेक्षण (external observation) से समझना कठिन होता है। इस कारण अन्तःदर्शन विधि (Introspection Method) से मन की आन्तरिक दुनिया की ऐसी जानकारी मिलती है जो अन्य विधियों से प्रायः उपलब्ध नहीं हो पाती।
- यह विधि व्यक्ति में आत्मनिरीक्षण, आत्म‑चिन्तन और आत्म‑मूल्यांकन (introspection, self-reflection and self-evaluation) की आदत विकसित करती है, जिससे वह अपने गुण‑दोष पहचानकर स्वयं को सुधारने का प्रयास कर सकता है। शिक्षक और विद्यार्थी दोनों के लिए यह आत्म‑समझ, आत्म‑नियंत्रण और व्यक्तित्व विकास (self-understanding, self-control and personality development) का महत्वपूर्ण साधन बन सकती है।
- अन्तःदर्शन विधि के लिए किसी विशेष यंत्र, प्रयोगशाला या तकनीकी साधन (special instruments, laboratories or technical equipment) की आवश्यकता नहीं होती; व्यक्ति स्वयं अपने अनुभवों का निरीक्षण और वर्णन करता है। इस वजह से यह विधि सरल, समय और धन दोनों की दृष्टि से किफायती तथा व्यावहारिक स्थितियों में आसानी से प्रयोज्य मानी जाती है।
- इस विधि में निष्कर्ष तत्काल घटित हो रहे प्रत्यक्ष अनुभवों पर आधारित होते हैं, इसलिए व्यक्ति की वर्तमान मानसिक स्थिति का जीवंत चित्र प्राप्त किया जा सकता है। किसी स्थिति में व्यक्ति वास्तव में क्या सोच रहा है या क्या महसूस कर रहा है, यह उसी के कथन से सीधे ज्ञात होता है, मध्यस्थ कम होते हैं।
- अन्तःदर्शन (Introspection) में वर्तमान क्षण के ‘जैसे घटित हो रहे’ मानसिक अनुभवों का निरीक्षण किया जाता है, बाद की स्मृति पर अधिक निर्भर नहीं रहा जाता। विचार, भावना, कल्पना, संकल्प (thought, emotion, imagination and resolution) आदि सूक्ष्म प्रक्रियाएँ प्रत्यक्ष बाह्य प्रेक्षण (direct external observation) से नहीं, बल्कि सीधे व्यक्ति के अंतर्मन (inner) के अवलोकन से जानी जाती हैं।
- इस विधि में व्यक्ति स्वयं ही प्रेक्षक भी है और अध्ययन का विषय भी, इसलिए उसके व्यक्तिगत पूर्वाग्रह, इच्छा‑अनिच्छा और स्व‑रक्षा की प्रवृत्ति (personal biases, desires and self-preservation) परिणामों को प्रभावित कर सकती है। एक ही मानसिक अनुभव के बारे में दो व्यक्तियों के विवरण अलग‑अलग हो सकते हैं, जिससे निष्कर्षों की स्थिरता और सामान्यीकरण कठिन हो जाता है।
- अनुभव केवल व्यक्ति के कथन पर आधारित होते हैं; इन्हें बाहरी रूप से जाँचना या दोहराकर सत्यापित करना लगभग असंभव होता है, इसलिए विधि की विश्वसनीयता कम मानी जाती है। मापन न तो मानकीकृत होता है और न ही सांख्यिकीय रूप से नियंत्रित, इस कारण यह आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान की कसौटी पर पूर्णतः खरा नहीं उतरता।
- छोटे बच्चों, मानसिक रूप से अविकसित, असामान्य अथवा अशिक्षित व्यक्तियों (young children, mentally retarded, abnormal, or uneducated individuals) से सही अन्तःदर्शन कराना लगभग असंभव होता है, क्योंकि वे अपने आन्तरिक अनुभवों को भाषा में ठीक से व्यक्त नहीं कर पाते। जिन व्यक्तियों में आत्म‑चिन्तन की क्षमता या ईमानदारी कम है, उनके द्वारा दी गई आत्म‑रिपोर्ट व्यवहार की वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाती।
- जिस समय व्यक्ति किसी मानसिक क्रिया में लीन होता है, उसी क्षण उस पर सजग ध्यान केन्द्रित करके उसका वर्णन करने से मूल प्रक्रिया टूट जाती है या उसका स्वरूप बदल जाता है। परिणामतः जो अनुभव बाद में बताया जाता है, वह अक्सर अपूर्ण या परिवर्तित रूप होता है, न कि वास्तविक और प्राकृतिक मानसिक प्रवाह।
- अन्तःदर्शन केवल चेतन अनुभवों पर लागू होता है; अचेतन या अर्ध‑चेतन मानसिक प्रक्रियाएँ (दबी इच्छाएँ, गहरे संवेग आदि) इस विधि से उपलब्ध नहीं हो पातीं। आधुनिक मनोविज्ञान में जहाँ अचेतन की भूमिका महत्त्वपूर्ण मानी जाती है, वहाँ यह विधि अपनी सीमा में बँधी प्रतीत होती है।
पियाजे का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत (Piaget’s Theory of Cognitive Development)
पियाजे का संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत (Piaget’s Theory of Cognitive Development)
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मनोविज्ञान का अर्थ (Meaning of Psychology) मनोविज्ञान शब्द के अंग्रेजी भाषा के Psychology का हिन्दी रूपांतरण है । Psychology शब्द की ...
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व्यवहार का अर्थ (Meaning of Behaviour) व्यवहार (Behaviour) का प्रचलन जे. बी. वाटसन द्वारा किया गया। वाटसन (Watson) के अनुसार व्यवहार ...
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मनोविज्ञान का विकास (Development of Psychology) मनोविज्ञान का विकास निम्न चरणों मे हुआ है - मनोविज्ञान आत्मा का विज्ञान है (Psychology i...





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