Tuesday, June 8, 2021

विस्मृति का अर्थ, परिभाषा तथा प्रकार (Meaning, Definition and Types of Forgetting)

 

विस्मरण या विस्मृति (Forgetting)

अर्थ (Meaning)-

किसी सीखी हुई वस्तु को स्मरण न कर सकना विस्मृति या विस्मरण कहलाती है। हमारे जीवन में अनेक ऐसी बातें जिन्हें हम भूल जाते हैं। मनुष्य के सफल जीवन के लिए स्मृति जितनी आवश्यक है विस्मृति भी उतनी ही आवश्यक है।

जैसे – अप्रिय बातों को या दुख की बातों को भूल जाना ही हमारे लिए अच्छा होता है। इससे मानसिक तनाव दूर हो जाता है। इस प्रकार हमारे जीवन में विस्मृति का भी उतना ही महत्व है जितना कि स्मृति का है।   

इसी प्रकार यदि हम अनावश्यक (Unnecessary) तथा  अनुपयोगी (Useless) चीजों अथवा बातों का विस्मरण न करें तो नई आवश्यक, उपयोगी तथा सार्थक (Meaningful) विषय सामग्री (Subject-matter)  को अपनी स्मृति में धारण करने में विफल रहेंगे । इसे मनोवैज्ञानिकों ने ऋणात्मक स्मृति (Negative memory) भी कहा है ।

परिभाषाएं (Definitions)-

मन (Munn) के अनुसार -    सीखे हुए तथ्यों को धारण करने या धारण करने के पश्चात् उन्हें पुनःस्मरण करने की असफलता को विस्मृति कहते हैं। (Forgetting is failing to retain or to be unable to recall what has been acquired.)

ड्रेवर (Draver) के अनुसार -  किसी समय प्रयास करने पर भी किसी पूर्व अनुभव का स्मरण करने या पहले सीखी हुई क्रिया को करने में असफल होना ही विस्मरण है।(Forgetting means failure at any time to recall an experience, when attempting to do so or to perform an action previously learned.)

सिगमण्ड फ्रायड (Sigman Freud) के अनुसार - “विस्मृति वह प्रवृत्ति है जो व्यक्ति के जीवन की दुःखद् तथा पीड़ादायक अनुभूतियों को चेतन से अलग करती है।” (Forgetting is a tendency toward off from the consciousness those experiences of life which are unpleasant and painful.) 

उपरोक्त परिभाषाओं के विश्लेषण से-

विस्मरण वह मानसिक प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति पूर्व में सीखे अनुभवों अथवा विषय-सामग्री (Content) का प्रत्यास्मरण (Recall) अथवा प्रतिभिज्ञान करने में असफल रहता है। विस्मृति व्यक्ति को कष्ट पहुँचाने वाले अनुभवों को चेतन में आने से रोकने का प्रयास करती है ।

विस्मृति के प्रकार (Types of Forgetting)

विस्मृति को मनोवैज्ञानिकों ने उसकी प्रकृति के आधार पर दो प्रकार की मानसिक प्रक्रिया में विभक्त किया है -

(1) सक्रिय विस्मृति (Active Forgetting)
(2) निष्क्रिय विस्मृति (Passive Forgetting)

(1) सक्रिय विस्मृति (Active Forgetting)-
जब व्यक्ति किसी बात को  जान-बूझकर भूलना चाहता है तो वह सक्रिय विस्मृति कहलाती है। इसमें व्यक्ति को भूलने के लिये प्रयास करना पड़ता है। दुःखद अनुभूतियों को सभी व्यक्ति भूलना चाहते हैं।
(2) निष्क्रिय विस्मृति (Passive Forgetting) - 
जब व्यक्ति  किसी बात को अपने-आप ही भूल जाता है तो वह निष्क्रिय विस्मृति कहलाती है। इसमें भूलने के लिये कोई प्रयास नहीं करना पड़ता ।


Monday, June 7, 2021

स्मरण करने की विधियाँ (Methods of Memorization)

 स्मरण करने की विधियाँ (Methods of Memorization)

सीखना स्मृति का एक अंग है लेकिन इन दोनों की विधियों में अन्तर है। स्मरण (Memorization) की प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं-



1. पूर्ण विधि (Whole Method)- 

जब कोई व्यक्ति सम्पूर्ण विषय सामग्री (Subject Matter) को एक साथ याद करता है तो इस प्रकार से स्मरण करने की विधि को पूर्ण विधि कहते हैं। अधिक बुद्धिमान बच्चों के लिए पूर्ण विधि से स्मरण करना प्रभावी होता है। 

2. आंशिक विधि (Part Method) -

जब कोई व्यक्ति किसी विषय सामग्री (Subject Matter) को कई भागों में विभक्त करके उन्हें अलग-अलग याद करता है तो इस प्रकार से स्मरण करने की विधि को आंशिक विधि कहते हैं। मन्द बुद्धि बालकों के लिए यह विधि उपयुक्त होती है। 

3. मिश्रित विधि (Mixed Method)-

जब कोई व्यक्ति किसी विषय सामग्री (Subject Matter), जिसकी मात्रा अधिक होती है, को स्मरण करने के लिए पूर्ण विधि एवं आंशिक विधि दोनों का प्रयोग करता है तो इस प्रकार स्मरण करने की विधि को मिश्रित विधि कहते हैं। रीड (Read) ने अपने प्रयोगों द्वारा यह निष्कर्ष निकाला कि जब विषय सामग्री काफी लम्बी (अधिक मात्रा में) होती है तो मिश्रित विधि अधिक प्रभावी होती है। यदि किसी व्यक्ति के लिए विषय सामग्री सार्थक (Meaningful) हो तो पूर्ण विधि अधिक उपयुक्त रहती है और यदि सामग्री कठिन हो तो आंशिक विधि के परिणाम अच्छे होते हैं। 

4. विराम विधि (Spaced Method) -

जब व्यक्ति किसी विषय सामग्री (Subject Matter) को स्मरण करने के बीच-बीच में आराम करके उसे दोहराता है तो इस विधि को विराम विधि कहते हैं। यह विधि स्थायी स्मृति के लिए उत्तम होती है। इस विधि से स्मरण करने में थकान कम होती है और पूरी क्षमता से याद करने का अवसर मिलता है।

5. अविराम विधि (Unspaced Method)- 

जब कोई व्यक्ति किसी विषय सामग्री (Subject Matter) को बिना किसी समय अन्तराल (Interval) के लगातार याद करता है तो इस प्रकार स्मरण करने की विधि को अविराम विधि कहते हैं। इस विधि में बिना विश्राम किए विषय सामग्री को बार-बार दोहराया जाता है। यह विधि तात्कालिक स्मृति (Immediate Memory) के लिए अच्छी होती है।

6. सक्रिय विधि (Active Method)- 

इस विधि में अधिगम सामग्री को बोल-बोल कर याद किया जाता है। यह विधि प्राथमिक स्तर के बच्चों के लिए उपयुक्त होती है। बोल-बोल कर याद करने से बच्चों के उच्चारण में भी शोधन होता है। 

7. निष्क्रिय विधि (Passive Method)- 

इस विधि में व्यक्ति बिना बोले मन-मन में विषय-वस्तु को दोहराता है। यह विधि उच्च स्तर की कक्षा के विद्यार्थियों तथा प्रौढ़ों के लिए उपयुक्त होती है।

8. वाचन विधि (Recitation Method)–

इस विधि में व्यक्ति विषय सामग्री को सस्वर (Resonance) पढ़ता है और फिर पुस्तक बन्द करके उसका प्रत्यास्मरण करता है। गेट्स (Gates) ने अपने प्रयोगों से लगातार पढ़ने की अपेक्षा वाचन को अधिक उपयोगी पाया। अन्य मनोवैज्ञानिकों के प्रयोगों के निष्कर्ष भी यह बताते हैं कि इससे सामग्री को धारण करने में वृद्धि होती है।

9. विचार साहचर्य विधि (Method of Association of Ideas)- 

इस विधि में याद की जाने वाली सामग्री का अन्य सामग्री से सम्बन्ध स्थापित कर लिया जाता है। ऐसा करने से अधिगम सामग्री का स्मरण शीघ्रता से होता है तथा वह एक लम्बे समय तक स्मृति में संचित भी रहती है।

10. लय विधि (Rhythm Method) - 

इस विधि में पाठ सामग्री को लय के साथ स्मरण किया जाता है। यह विधि छोटी कक्षा के बच्चों के लिए उपयोगी पायी गई है। इसमें बच्चे गा-गा कर याद करते हैं। 

11. निरीक्षण विधि (Inspection Method)- 

इस विधि में पाठ्य सामग्री का पहले निरीक्षण (Inspection) एवं अवलोकन (Observation) किया जाता है। इस विधि के अनुसार छात्र पहले पूर्ण पुस्तक का अवलोकन करते हैं और उसकी रूपरेखा (Outline) को समझ लेते हैं, इसके बाद विषय वस्तु  को याद करते हैं ।

12. क्रिया विधि (Action Method)-

इस विधि में स्मरण की जाने वाली बात के साथ-साथ कार्य करते हुए स्मरण किया जाता है। इसमें बालक की कर्मेन्द्रियाँ (Work Senses) एवं ज्ञानेन्द्रियाँ (Senses) दोनों एक साथ क्रियाशील रहती हैं। इस विधि से पाठ को सरलतापूर्वक और शीघ्रता से याद  किया  जा सकता है।

13. प्रगतिशील विधि (Progressive Method)- 

इस विधि में विषय-सामग्री (Subject-matter) को अनेक खण्डों में बाँट लिया जाता है। सबसे पहले प्रथम खण्ड को याद किया जाता है, उसके बाद प्रथम एवं दूसरे खण्ड को एक साथ याद करते हैं। फिर इसके बाद पहले, दूसरे और तीसरे खण्ड को एक साथ याद करते हैं। इस प्रकार जैसे-जैसे स्मरण करने के कार्य में प्रगति होती है, वैसे-वैसे एक नया खण्ड जोड़ दिया जाता है। इस विधि में समय अधिक लगता है और आरम्भ के कुछ खण्डों का स्मरण अधिक होता है और बाद के खण्डों का स्मरण कम होता जाता है।


Sunday, June 6, 2021

स्मृति को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Influencing Memory)

 स्मृति को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Influencing Memory)


स्मृति को अनेक तत्व प्रभावित करते हैं जिनमें निम्नलिखित मुख्य हैं -

1. शारीरिक स्वास्थ्य (Physical Health) - शारीरिक स्वास्थ्य का प्रभाव स्मृति पर पड़ता है। जो बच्चे अस्वस्थ रहते हैं उनकी स्मृति कमजोर होती है। 

2. मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health)-   मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति की स्मृति अच्छी होती है। जो बच्चे मानसिक बीमारी (Mental Disease), भय, चिन्ता एवं अन्य मानसिक विकारों से ग्रस्त होते हैं उनकी स्मृति अच्छी नहीं होती है।

3. प्रेरणा ( Motivation)-  अभिप्रेरित व्यक्ति जल्दी सीखता है, सीखी हुई सामग्री को लम्बे समय तक धारण करता है और आवश्यकता पड़ने पर उसका शीघ्र प्रत्यास्मरण करता है। 

4. अधिगम सामग्री की प्रकृति (Nature of Learning Material)- व्यवस्थित (Arranged) एवं बोधगम्य (Understandable) सामग्री होने से बालक उन्हे जल्दी स्मरण कर लेता है।  

5. सीखने वाले की इच्छा शक्ति (Learner's Willingness)- सीखने वाला यदि सीखना चाहता है तो ही पाठ्य-सामग्री को याद कर सकेगा अन्यथा नहीं। जितनी सीखने की प्रबल इच्छा शक्ति (Strong Desire Power)  होती है उतना ही जल्दी स्मरण होता है।

6. रुचि एवं अवधान (Interest and Attention)- रुचि एवं ध्यान आकृष्ट (Attracted) होने से व्यक्ति जल्दी सीखता है। 

7. स्मरण विधि (Memory Method) -   बालक स्मरण करने के लिए जिस विधि का उपयोग करता है उसका उसकी स्मरण करने की प्रक्रिया पर असर होता है। व्यवस्थित एवं सरल पाठ्य सामग्री को पूर्ण विधि से जल्दी याद किया जा सकता है, कठिन सामग्री के लिए आंशिक विधि उत्तम होती है।

8. अभ्यास एवं दोहराना (Practice and Repetition)- पाठ्य-वस्तु का जितना अधिक अभ्यास एवं दोहराना होता है उसे उतना ही अधिक स्थायी रूप से स्मृति में अंकित किया जा सकता है। 

9. शिक्षण विधि (Teaching Method)- शिक्षक द्वारा अपनाई जाने वाली शिक्षण विधि का याद करने पर प्रभाव होता है।

10. शिक्षक का व्यवहार (Teacher's Behaviour)- शिक्षक का प्रेम एवं स्नेहमय व्यवहार बालक को याद करने में अनुकूल प्रभाव डालता है।

11.परीक्षण (Testing) परीक्षणों के द्वारा बालकों की स्मरण शक्ति का विकास किया जा सकता है। इसलिये स्मृति को गति देने के लिये परीक्षण और मूल्यांकन (Testing & Evaluation) होते रहना चाहिये। चूंकि नकारात्मक परीक्षण स्मृति को सुस्त बना देते हैं, अतः शिक्षक को परिणामों की व्याख्या में निराशा व्यक्त न करके चेतावनी देते हुये उनका उत्साहवर्धन (Encouragement) करना चाहिये ।

12. वातावरण (Environment)- अच्छी स्मृति के लिए उपयुक्त वातावरण का होना भी महत्व रखता है। किसी विषय को याद करने या सीखने के लिए शांतिपूर्ण व स्वस्थ वातावरण तथा उपयुक्त समय की आवश्यकता होती है, जैसे- प्रातःकाल शांतिपूर्ण वातावरण में शरीर और मस्तिष्क दोनों ताजे रहते हैं और जो कुछ भी पढ़ा जाता है वह शीघ्र याद हो जाता है। अतः अभिभावकों और शिक्षकों को इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए।



अच्छी स्मृति की विशेषताएँ (Characteristics of Good Memory)

 अच्छी स्मृति की विशेषताएँ (Characteristics of Good Memory)


 अच्छी स्मृति के प्रमुख लक्षण या विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-

1. शीघ्र याद होना या अधिगम (Quick Learning)- 

अच्छी स्मृति का प्रथम लक्षण है जल्दी याद होना। जो बालक किसी बात को एक बार पढ़ लेने या सुन लेने से याद कर लेता है तो उसकी स्मृति अच्छी कही जाती है।

2. उत्तम धारण-शक्ति (Good Retention)- 

यदि कोई बालक सीखी या याद की हुई बातों को अधिक दिनों तक स्मरण रख सकता है तो उसकी स्मृति अधिक स्थायी होती है। यह अच्छी स्मृति का लक्षण है।

3. शीघ्र पुनः स्मरण (Quick Recall)- 

अच्छी स्मृति में यह गुण भी होता है कि व्यक्ति सीखी गई बात का तुरंत प्रत्यास्मरण (Recall) कर लेता है। अच्छी स्मृति वाला व्यक्ति धारण (Retention) की गई विषय सामग्री को आवश्यकता पड़ने पर बिना किसी विलंब के तुरंत प्रस्तुत कर देता है।

4. शीघ्र एवं स्पष्ट पहचानना (Quick and Accurate of Recognition)- 

अच्छी स्मृति के लिए शीघ्र पुनः स्मरण ही नहीं बल्कि किसी विषय को शीघ्र एवं स्पष्ट रूप से पहचानना भी आवश्यक है। बालक ने विषय से सम्बन्धित बहुत-सी बातों को पढ़ा, सीखा और याद किया है, परीक्षा के समय वह उन बातों को पुनः स्मरण करता है किन्तु बिना शीघ्र एवं स्पष्ट रूप से पहचाने हुए वह वांछित प्रश्न का उत्तर देने में समर्थ नहीं हो सकता।

5. अनावश्यक बातों को भूलना (Forgetting of Meaningless Things)- 

अच्छी स्मृति का एक आवश्यक लक्षण यह भी है कि बालक व्यर्थ की बातों को भूल जाय और उपयोगी बातें ही याद रखे। अनावश्यक बातें याद रहने से उपयोगी बातों के पुनः स्मरण (Recall), धारण (Attention) एवं पहचान (Recognition) में बाधा पड़ती है।

6. सीखी गई विषय वस्तु को व्यवस्थित करना (Organization of the learned information)- 

सीखी गई सामग्री का हम ठीक प्रकार से प्रत्यास्मरण (Recall) तभी कर सकते हैं जबकि वह मस्तिष्क में व्यवस्थित रूप से संचित की गई हो। अच्छी स्मृति वाला व्यक्ति सूचनाओं को क्रमबद्ध (Systematic) ढंग से मस्तिष्क में संचित (Store) करता है और आवश्यकता पड़ने पर उसका आसानी से प्रत्यास्मरण कर लेता है।

7.  अच्छी सूझ एवं समझ (Good insight and Understanding)-

अच्छी स्मृति वाला व्यक्ति सूझ तथा समझ के द्वारा जल्दी सीख लेता है । यह प्रयत्न तथा भूल के द्वारा सीखने में समय नष्ट नही करता है।

8. व्यवहार्य (Serviceable)- 

स्मृति की व्यवहार्यता से तात्पर्य है व्यक्ति उचित समय, उचित स्थान पर तथा उचित ढंग से प्रत्यास्मरण (Recall) करें। यदि कोई छात्र जिन चीजों को घर पर याद करके जाता है तथा परीक्षा भवन में उनका प्रत्यास्मरण (Recall) करने में असमर्थ रहता है तो यही कहा जायेगा कि उसकी स्मृति व्यवहार्य (Serviceable) नही है।















Lesson Plan of Mathematics


 




शैक्षिक मनोविज्ञान की विधियाँ (Methods of Educational Psychology)

 शैक्षिक मनोविज्ञान की विधियाँ (Methods of Educational Psychology) शैक्षिक मनोविज्ञान में विद्यार्थियों के व्यवहार (Behaviour), सीखने की प्र...