Monday, August 17, 2020

Role of UNESCO in Education

  यूनेस्को (UNESCO)


 यूनेस्को (UNESCO) 'संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (United Nations Educational Scientific and Cultural Organization)' का लघुरूप है।
संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) संयुक्त राष्ट्र का एक घटक निकाय है। इसका कार्य शिक्षा, प्रकृति तथा समाज विज्ञान, संस्कृति तथा संचार के माध्यम से अंतराष्ट्रीय शांति को बढ़ावा देना है। संयुक्त राष्ट्र की इस विशेष संस्था का गठन 16 नवम्बर 1945 को हुआ था। इसका उद्देश्य शिक्षा एवं संस्कृति के अंतरराष्ट्रीय सहयोग से शांति एवं सुरक्षा की स्थापना करना है, ताकि संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में वर्णित न्याय, कानून का राज, मानवाधिकार एवं मौलिक स्वतंत्रता हेतु वैश्विक सहमति बने|

यूनेस्को के 193 सदस्य देश हैं और 11 सहयोगी सदस्य देश और दो पर्यवेक्षक सदस्य देश हैं। इसके कुछ सदस्य स्वतंत्र देश भी हैं। इसका मुख्यालय पेरिस (फ्रांस) में है। इसके ज्यादार क्षेत्रीय कार्यालय क्लस्टर के रूप में है, जिसके अंतर्गत तीन-चार देश आते हैं, इसके अलावा इसके राष्ट्रीय और क्षेत्रीय कार्यालय भी हैं। यूनेस्को के 27 क्लस्टर कार्यालय और 21 राष्ट्रीय कार्यालय हैं।

यूनेस्को मुख्यतः शिक्षा, प्राकृतिक विज्ञान, सामाजिक एवं मानव विज्ञान, संस्कृति एवं सूचना व संचार के जरिये अपनी गतिविधियां संचालित करता है। वह साक्षरता बढ़ानेवाले कार्यक्रमों को प्रायोजित करता है और वैश्विक धरोहर की इमारतों और पार्कों के संरक्षण में भी सहयोग करता है। यूनेस्को की विरासत सूची में हमारे देश के कई ऐतिहासिक इमारत और पार्क शामिल हैं। दुनिया भर के 332 अंतरराष्ट्रीय स्वयंसेवी संगठनों के साथ यूनेस्को के संबंध हैं। भारत 1946 से यूनेस्को का सदस्य देश है।

यूनेस्को की भूमिका में लिखा है- "चूंकि युद्ध मनुष्यों के मस्तिष्कों में आरम्भ होते है, इसलिये शान्ति की रक्षा के साधन भी मनुष्य के मस्तिष्क से ही निर्मित किये जाने  चाहिये। न्याय तथा शान्ति बनाये रखने के लिये मानवता की शिक्षा तथा संस्कृति का व्यापक  प्रसार मानव की महत्ता के लिये आवश्यक है। यह एक ऐसा पवित्र कर्तव्य है, जो प्रत्येक राष्ट्र के आपसी सहयोग की भावना के आधार पर पूरा करना चाहिये। केवल सरकार के राजनीतिक तथा आर्थिक समझौतों तथा बन्धनों द्वारा स्थापित की हुई शान्ति को ऐसी शान्ति नहीं कहा जा सकता, जिसे संसार के सभी लोग एकमत होकर स्वीकार कर ले इस दृष्टि से यदि शान्ति को कभी असफल नहीं होना है तो उसे मानव जाति की बौद्धिक तथा नैतिक मूल्यों पर आधारित होना चाहिए।"


यूनेस्को के कार्य
(Functions of UNESCO)


अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिये यूनेस्को निम्नलिखित कार्य कर रहा है-

1. यूनेस्को इस बात का प्रयास कर रहा है कि विभिन्न राष्ट्रों के बीच फैला हुआ भय, स्नेह तथा अविश्वास दूर हो जाये, जिससे उनके आपसी सम्बन्ध अच्छे बन सकें।

2. यह संघ इस बात के लिये विशेष प्रयास कर रहा है कि संसार के सभी पिछड़े हुये देशों से निरक्षरता तथा अज्ञानता समाप्त हो जाये। 

3. यह संस्था प्रत्येक राष्ट्र के साहित्य, विज्ञान, संस्कृति तथा कला को अन्य राष्ट्रों के निकट पहुँचाने का प्रयास करती है, जिससे संसार के प्रत्येक राष्ट्र को दूसरे राष्ट्रों के बौद्धिक विकास का ज्ञान हो जाये। 

4. यूनेस्को शोधकर्ताओं को आर्थिक सहायता देता है, जिससे अधिक से अधिक शोध कार्य हो सके।

5. यह संस्था शिक्षकों, विचारकों तथा वैज्ञानिकों को इस बात के अवसर प्रदान करती है कि वे परस्पर विचार-विमर्श कर सकें, जिससे रचनात्मक कलाओं का सृजन होता रहे।

6. यह विभाग पिछड़े हुये राष्ट्रों के स्कूलों को आर्थिक सहायता देता है। 

7. यूनेस्को विभिन्न राष्ट्रों की पाठ्यपुस्तकों में शोध तथा पाठ्यक्रमों के निर्माण हेतु परामर्श देता है एवं महत्त्वपूर्ण साहित्यिक ग्रन्थों का अनुवाद भी करता है।

8. यह विभाग अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर साहित्य की प्रदर्शनियों का आयोजन करता है, जिससे अन्तर्राष्ट्रीय सद्भावना विकसित हो जाये।

यूनेस्को की शिक्षा में भूमिका 


यूनेस्को के कार्य शिक्षा, विज्ञान एवं संस्कृति तथा जन-संचार के विविध एवं विस्तृत क्षेत्रों से सम्बन्धित होते हैं। यूनेस्को के माध्यम से लेखकों, कलाकारों, वैज्ञानिक तथा अन्य बुद्धिजीवियों के बीच राष्ट्रीय अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग का विकास होता है। शिक्षा का विकास, विज्ञान का मानव कल्याण के लिये प्रयोग तथा मानव-जाति की संस्कृति के संरक्षण आदि की व्यवस्था यूनेस्को के प्रयासों से सम्भव है। यूनेस्को ज्ञान को संचय करता है, उसकी अभिवृद्धि करता है तथा उसका प्रसार करता है। प्राकृतिक विज्ञान के क्षेत्रों में सचिवालय ने समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान आदि की वार्षिक ग्रन्थ-सूचियाँ प्रकाशित की हैं। ये ग्रन्थ-सूचियाँ विशेष अध्ययन एवं शोध के लिये बहुत उपयोगी सिद्ध हुई हैं।


1- सभी तीन फोकस क्षेत्रों – पहुंच, गुणवत्‍ता एवं अंतर्वस्‍तु पर शिक्षा में भारत सरकार और यूनेस्‍को के बीच घनिष्‍ट एवं सतत सहयोग का इतिहास रहा है। भारत सबके लिए शिक्षा (ई.एफ.ए.) के लक्ष्‍यों, 2015 पश्‍चात वैश्विक शिक्षा एजेंडा तथा संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव की वैश्विक शिक्षा प्रथम पहल (जी.ई.एफ.आई.) की दिशा में यूनेस्‍को के प्रयासों का हिस्‍सा रहा है, जिसकी यूनेस्‍को अग्रणी कार्यान्‍वयन एजेंसी है। प्रारंभिक बाल्‍यावस्‍था देखरेख एवं शिक्षा, माध्‍यमिक शिक्षा, तकनीकी एवं व्‍यावसायिक शिक्षा तथा प्रशिक्षण, उच्‍च शिक्षा आदि में भारत सरकार को नीतिगत एवं कार्यक्रम संबंधी सहायता के माध्‍यम से भारत में यूनेस्‍को द्वारा ई एफ ए के लक्ष्‍यों की प्राप्ति में सहयोग किया जाता है। इस समय भारत शिक्षकों पर ई एफ ए कार्य बल का अध्‍यक्ष है। यूनेस्‍को अपनी पीठ के कार्यक्रम के माध्‍यम से अनुसंधान की क्षमता बढ़ाने के लिए काम कर रहा है।

2- भारत में शिक्षा पर यूनेस्‍को के हाल के महत्‍वपूर्ण सम्‍मेलनों में कौशल एवं शिक्षा पर एशियाई शिखर बैठक शामिल है जिसमें संपूर्ण एशियाई क्षेत्र से शिक्षाविदों, मंत्रियों और नीतिनिर्माताओं ने भाग लिया। अफगानिस्‍तान इस्‍लामिक गणराज्‍य के माननीय शिक्षा मंत्री डा. फारूक वारडक ने शिखर बैठक का उद्घाटन किया। सार्क के शिक्षा मंत्रियों की दूसरी बैठक नई दिल्‍ली में 30-31 अक्‍टूबर, 2014 को हुई जिसमें सार्क शिक्षा विकास के लक्ष्‍यों पर प्रगति की समीक्षा की गई

3- संस्‍कृति और विरासत भारत में यूनेस्‍को की सबसे प्रमुख गतिविधियों में से एक है तथा इसमें यूनेस्‍को की विश्‍व विरासत सूची में शामिल भारत की सांस्‍कृतिक एवं सभ्‍यतागत विरासत की रक्षा करना शामिल है। वास्‍तव में, 1972 का विश्‍व विरासत अभिसमय और प्रख्‍यात भारतीय श्री किशोर राव की अध्‍यक्षता में विश्‍व विरासत केंद्र के माध्‍यम से इसका कार्यान्‍वयन यूनेस्‍को का एक फ्लैगशिप कार्यक्रम है तथा यह संस्‍कृति मंत्रालय तथा भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण के निकट सहयोग से काम करता है। संयुक्‍त राष्‍ट्र विश्‍व विरासत समिति के सदस्‍य के रूप में भारत इस समय अनेक सांस्‍कृतिक एवं प्राकृतिक परियोजनाओं के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय मान्‍यता प्राप्‍त करने का प्रयास कर रहा है।

4- संस्‍कृति एवं सूचना प्रौद्योगिकी के तहत, यूनेस्‍को डिजिटल सशक्तीकरण प्रतिष्‍ठान के साथ साझेदारी कर रहा है। ग्रामीण भारत के कारीगरों एवं कलाकारों के लिए ‘आई सी टी का प्रयोग’ पर हाल के सम्‍मेलन में कलाकार एवं ग्रामीण कारीगर, शिल्‍पी संगठन, ऑन लाइन शिल्‍प रिटेलर तथा कला एवं संस्‍कृति के क्षेत्र में आई सी टी का प्रयोग करके नवाचारी कार्य करने वाले संगठन एकत्र हुए। डिजिटल अर्काइव, ग्रामीण क्षेत्रों से लोक कंसल्‍ट का लाइव वेब कास्‍ट, विरासत का समुदाय आधारित प्रलेखन तथा परफार्मर का कापीराइट सहित विविध पहलों पर प्रस्‍तुतियां दी गई।

5- भारत में 25 मिलियन श्रोताओं के साथ विश्‍व रेडियो दिवस मनाने में यूनेस्‍को ‘सामुदायिक रेडियो एवं सामाजिक समावेशन’ पर एक राष्‍ट्रीय कार्यक्रम के लिए सहायता प्रदान कर रहा है। इसके तहत यूनेस्‍को द्वारा स्‍थापित ''सामुदायिक मीडिया पर दक्षिण एशिया नेटवर्क’’ के उद्घाटन तथा ''आंतरिक पलायन – सामुदायिक रेडियो के लिए मैनुअल’’ नामक यूनेस्‍को के प्रशिक्षण मैनुअल के समर्पण के साथ एक उद्घाटन सत्र शामिल होगा।

6- यह रेखांकित करना जरूरी है कि यूनेस्‍को में विज्ञान के लिए ‘एस’ को उस समय विशेष स्‍थान दिया गया जब संगठन स्‍थापित किया गया। द्वितीय विश्‍व युद्ध की समाप्ति के शीघ्र बाद संक्षेपाक्षर यूनेस्‍को में से विज्ञान के लिए ‘एस’ गायब हो गया। सर जूलियन, हक्‍सले के नेतृत्‍व में यूनाइटेड किंगडम के वैज्ञानिक समूह ने सुनिश्चित किया कि नवंबर, 1945 में ‘एस’ जोड़ा गया जिससे इसके बाद संयुक्‍त राष्‍ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्‍कृतिक संगठन (यूनेस्‍को) का सृजन हुआ। पहली बार, किसी अंतर्सरकारी संगठन को विज्ञान में अंतर्राष्‍ट्रीय संबंधों के विकास की महती जिम्‍मेदारी सौंपी गई थी। इस क्षेत्र की गतिविधियों में निम्‍नलिखित शामिल हैं :


· विज्ञान में क्षमता का सुदृढ़ीकरण;
· विज्ञान नीति से संबंधित गतिविधियां;
· विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लिए सूचना प्रणालियां; और
· विज्ञान, समाज एवं विकास।

7- प्रमुख विशेषताओं में भारत के प्राकृतिक बायोस्फियर भंडार, महासागरीय संसाधन तथा जल शामिल हैं, जो प्राकृतिक विज्ञान के क्षेत्र में भारत - यूनेस्‍को सहयोग के फोकस क्षेत्र हैं। भारत 2015 में आई आई ओ ई की 50वीं वर्षगांठ मनाने के लिए दूसरे अंतर्राष्‍ट्रीय हिंद महासागर अन्‍वेषण (आई आई ओ ई – 2) के लिए अंतर्सरकारी महासागर आयोग का समर्थन करने की योजना बना रहा है। भारत इस आयोग की कार्यपालक परिषद का सदस्‍य है। मानव एवं बायोस्फियर कार्यक्रम वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्‍यम से मानव जाति एवं उनके पर्यावरण के बीच संबंध को संवारने की दिशा में काम कर रहा है तथा भारत के नौ बायोस्फियर भंडार यूनेस्‍को के बायोस्फियर भंडार के विश्‍व नेटवर्क में शामिल हैं।


सन्दर्भ ग्रन्थ सूची 


१-https://mea.gov.in/in-focus-article-hi.htm?25040/India+and+UNESCO+The+dynamics+of+a+historic+and+time+tested+friendship

२- https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%8B

३- शर्मा, आर0ए0 (2011), तुलनात्मक शिक्षा, मेरठ, आर0लाल बुक डिपो।

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